नन्हीं जान, बड़ा खौफ : हमलावर गिलहरी से सहमा आर्ट्स कॉलेज परिसर, 18 से अधिक छात्रों और कर्मचारियों के शरीर पर गढ़ा चुकी दंत
गिलहरी की तेजी और चपलता के कारण उसे पकड़ना संभव
आमतौर पर मासूम और फुतीर्ली दिखने वाली गिलहरी इन दिनों डर का पर्याय बन गई। मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के आर्ट्स कॉलेज परिसर में एक गिलहरी ने ऐसा आतंक मचाया है कि छात्र-छात्राएं अब खुले में बैठने और सामान्य आवाजाही से भी कतराने लगे हैं।
उदयपुर। आमतौर पर मासूम और फुतीर्ली दिखने वाली गिलहरी इन दिनों डर का पर्याय बन गई है। मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के आर्ट्स कॉलेज परिसर में एक गिलहरी ने ऐसा आतंक मचाया है कि छात्र-छात्राएं अब खुले में बैठने और सामान्य आवाजाही से भी कतराने लगे हैं। पिछले एक महीने में यह गिलहरी 18 से अधिक छात्रों और कर्मचारियों को काट चुकी है। घटनाओं की बढ़ती संख्या ने पूरे परिसर में भय का माहौल पैदा कर दिया है। कॉलेज स्टाफ के अनुसार, गिलहरी अचानक झपट्टा मारती है और फिर तेजी से गायब हो जाती है, जिससे उसे पकड़ना मुश्किल हो रहा है।
हाल ही में 22 अप्रैल को दो शोधार्थियों पर हमला हुआ, जबकि अगले ही दिन एक कर्मचारी बाल-बाल बच गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गिलहरी पर्दों, कमरों और झाड़ियों में छिपकर बैठती है और मौका मिलते ही हमला करती है। एक छात्रा ने बताया कि साइकोलॉजी और वीमेन स्टडीज विभाग के पास उसने पहले एक छात्रा को काटा और फिर तुरंत दूसरी पर झपट पड़ी। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि रेस्क्यू टीम को बुलाया गया, लेकिन गिलहरी की तेजी और चपलता के कारण उसे पकड़ना संभव नहीं हो सका।
विशेषज्ञों की चेतावनी
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि असामान्य परिस्थितियों में गिलहरियों का व्यवहार आक्रामक हो सकता है। अत्यधिक गर्मी, भूख या तनाव इसके पीछे कारण हो सकते हैं। पूर्व मुख्य वनसंरक्षक राहुल भटनागर के अनुसार, यह गिलहरी संभवत: रेबिज से संक्रमित हो सकती है, जिससे इसका व्यवहार बदल गया है। डॉ. हिमांशु व्यास ने इसे दुर्लभ घटना बताते हुए कहा कि यह अपने बच्चों की सुरक्षा या पूर्व में इंसानों के संपर्क में रहने के कारण भी आक्रामक हो सकती है।

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