इजरायल ने गोल्डन होराइजन मिसाइल का भारत को दिया ऑफर : ब्रह्मोस से भी तेज, 2 ,000 किमी रेंज; सुखोई-30एमकेआई से दागी जा सकती
गोल्डन होराइजन मिसाइल की रेंज क्या है
यह मिसाइल मजबूत से मजबूत अंडरग्राउंड स्ट्रैटजिक फैसिलिटी को पलक झपकते ही मिट्टी में मिलाने के लिए ही डिजाइन की गई है।
नई दिल्ली। इजरायल को लेकर रिपोर्ट है कि उसने अपना महाविनाशक गोल्डन होराइजन मिसाइल भारत को देने का ऑफर दिया है। यह एक एयर लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल है, जो डीप स्ट्राइक वेपन है। यह मिसाइल मजबूत से मजबूत अंडरग्राउंड स्ट्रैटजिक फैसिलिटी को पलक झपकते ही मिट्टी में मिलाने के लिए ही डिजाइन की गई है।
गोल्डन होराइजन मिसाइल की रेंज क्या है
गोल्डन होराइजन मिसाइल की ज्यादा विशेषताएं आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं हुई हैं। लेकिन, बताया जाता है कि यह इजरायल के सिल्वर स्पैरो का ही नया वेरिएंट है, जो फाइटर जेट से दागी जा सकती हैं। अलग-अलग डिफेंस रिपोर्ट के मुताबिक इस मिसाइल की अनुमानित रेंज 1,000 से 2,000 किलो मीटर तक हो सकती है। मतलब, भारत के संदर्भ में पाकिस्तान की वायु सीमा में घुसे बिना भी उसके तमाम सामरिक ठिकाने भारतीय वायु सेना की स्ट्राइक रेंज में आ सकते हैं। गोल्डन होराइजन के बारे में कहा जाता है कि इसे विशेष तौर पर बहुत ही मजबूत और जमीन की काफी गहराई में छिपे टारगेट के विनाश के लिए ही तैयार किया गया है।
इसके टारगेट में अंडरग्राउंड शक्तिशाली बंकर, जमीन के अंदर बने मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर और सतह के नीचे मौजूद परमाणु ठिकाने शामिल हो सकते हैं। आज रणनीतिक तौर पर ऐसे कंक्रीट मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहे हैं, जिन्हें तबाह करने के लिए बहुत ही तेज रफ्तार और गहराई तक मार करने वाले शक्तिशाली हथियारों की जरूरत होती है और गोल्डन होराइजन को उसमें पूरी तरह से सक्षम बताया जा रहा है।
गोल्डन होराइजन मिसाइल की स्पीड
एयर लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल होने की वजह से गोल्डन होराइजन फाइटर जेट से हवा से दागे जाने के बाद एक निश्चित ऊंचाई तक चढ़ती है और फिर अपनी टारगेट की ओर बहुत ही तेज रफ्तार के साथ नीचे उतरती है और कुछ ही क्षणों में दुश्मन के वह ठिकाने तबाह हो जाते हैं। रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसकी टर्मिनल वेलोसिटी हाइपरसोनिक स्तर या मैक 5 तक जा सकती है। इतनी ज्यादा स्पीड की वजह से इसे परंपरागत एयर डिफेंस सिस्टम से पता लगाना पाना बहुत ही ज्यादा मुश्किल है।
सुखोई-30एमकेआई से दागी जा सकती
ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसकी अधिकतम स्पीड मैक 3 तक है। ऐसे में गोल्डन होराइजन के लिए इजराइल से डील हो गई तो पाकिस्तान की नींद गायब होनी तय है, जो आॅपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस के कहर से अभी तक नहीं उबर पाया है। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित इजरायल दौरे में इसपर बात बनती है तो ये इजरायली मिसाइल भारतीय वायु सेना के सुखोई-30एमकेआई का हिस्सा बन सकती हैं।

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