धन तेरस को लेकर असमंजस बरकरार, गौवर्धन पूजा 26 को

अमावस्या बिगाड़ रही दीपावली पर्व की क्रमबद्धता

धन तेरस को लेकर असमंजस बरकरार, गौवर्धन पूजा 26 को

दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का त्योहार मनाया जाता है, लेकिन इस दिन सूर्य ग्रहण का साया रहेगा। ऐसे में शास्त्रों के अनुसार अगले दिन प्रतिपदा युक्त द्वितीय तिथि में गोवर्धन पूजा व अन्नकूट का पर्व 26 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

कोटा। उल्लास व खुशियों का दीपावली पर्व इस बार 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा। हालांकि पांच दिवसीय पर्व की शुरुआत को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस सम्बंध में ज्योतिषाचार्यो के अलग-अलग मत है। इस बार समय गणना के चलते यह स्थिति उत्पन्न हुई है। ज्योतिषाचार्य अमित जैन ने बताया कि धनतेरस कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस त्योहार से दिवाली के पंचपर्व का आगाज हो जाता है। इस बार धनतेरस पर्व 22-23 अक्टूबर को मनाया जाएगा। धनतेरस को धन त्रयोदशी व धन्वंतरी जयंती के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के जनक धन्वंतरी देव समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। धनतेरस पर सोना, चांदी, बर्तन खरीदना बेहद शुभ माना जाता है।

गोवर्धन पूजा व अन्नकूट महोत्सव 
दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का त्योहार मनाया जाता है, लेकिन इस दिन सूर्य ग्रहण का साया रहेगा। ऐसे में शास्त्रों के अनुसार अगले दिन प्रतिपदा युक्त द्वितीय तिथि में  गोवर्धन पूजा व अन्नकूट का पर्व 26 अक्टूबर को मनाया जाएगा। भाई दूज व यम द्वितीय कार्तिक शुक्ल द्वितीय तिथि 27 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

सभी त्योहारों में असमंजस की स्थिति
ज्योतिषाचार्य जैन ने बताया कि इस साल की शुरुआत से ही सभी तीज त्योहारों होली, राखी, दीपावली को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। धनतेरस पर ग्रहों का बहुत ही अच्छा संयोग बन रहा है। दरअसल धनतेरस पर शनि मार्गी होने जा रहे हैं। इस दिन से कई राशियों के जीवन में शुभ बदलाव आएंगे। उन्होंने बताया कि शनिवार 22 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 3 मिनट से कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि लग रही है जिसे धनतेरस कहा जाता है। इसी दिन यमदीप भी निकाला जाएगा। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 23 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 4 मिनट तक रहेगी। रविवार को त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल में बहुत कम समय ले लिए रहेगी। अत: राजस्थान ,गुजरात, महाराष्ट्र, एमपी में धनतेरस 22 अक्टूबर को मनाना शास्त्र सम्मत रहेगा, लेकिन भारत के पूर्वी भाग में सूर्यास्त का समय पहले होने के कारण यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा में धनतेस 23 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

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नरक चतुर्दशी/ रूप चौदस
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 23 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 4 मिनट तक रहेगी और इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू होगी, जो 24 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। चतुर्दशी तिथि प्रदोष व्यापिनी होने से चतुर्दशी निमित्त सायं काल दीपदान होगा। वहीं हनुमान जयंती भी 24 को मनाई जाएगी। ऐसा संयोग 2019 में भी बना था जब दीपावली पूजन और हनुमान जयंती एक ही दिन मनाई गई थी।

सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर को
साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर को लगने वाला है। हालांकि यह भारत का साल का पहला सूर्यग्रहण होगा जो दिखाई देगा। ग्रहण खण्डग्रास के रूप में भारत के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से यूरोप, दक्षिणी/पश्चिमी एशिया, अफ्रीका और अटलांटिका में दिखाई देगा। भारत में जहां-जहां ये ग्रहण दिखाई देगा, वहां-वहां इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व माना जाएगा।  ग्रहण का सूतक 25 अक्टूबर को सुबह 4 बजकर 15 मिनट से शुरू होगा और 25 की शाम 6 बजकर 25 मिनट पर मोक्ष काल पर समाप्त होगा।

इधर ज्योतिषियों के अलग मत
विधान के अनुसार प्रदोष काल में जो तिथि मानी जाती है उसी के आधार पर त्योहार मनाया जाता है।  इस बार 23 अक्टूबर को त्रयोदशी योग बन रहा है। इस कारण पर्व की शुरुआत इसी दिन से होगी। इसके बाद 24 अक्टूबर को सुबह रूप चतुर्दशी व हनुमान जयंती मनाई जाएगी। इस दिन प्रदोष काल से पहले ही अमावस्या लग गई है। ऐसे में दिन में दीपावली का पूजन नहीं हो सकेगा। रात को पूजन किया जा सकेगा। इसी दिन दीवाली का पर्व मनेगा। इस दिन अमावस्या तिथि 5 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी, जो दूसरे दिन 4 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। 25 को पितृ अमावस्या रहेगी। भाईदूज का पर्व 26 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
-ज्योतिषाचार्य आचार्य धीरेन्द्र

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शास्त्र सम्मत के अनुसार इस साल दीपावली का पर्व 24 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा। इस बार धनतेरस तीन दिन पहले नहीं मनेगी।  ऐसे में धनतेरस व रूप चौदस का पर्व 23 अक्टूबर को होगा। इसके बाद 24 को दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। 25 अक्टूबर को अमावस्या होगी, जो शुभ नहीं है। इसी दिन सूर्यग्रहण होगा। इस कारण सभी शुभ कार्य दो दिन में ही पूर्ण किए जाएंगे। समय चक्र के बदलने से तिथियों में बदलाव होता रहता है।          
 -ज्योतिषाचार्य नागेन्द्र प्रतिहस्त

लक्ष्मी, गणेश व कुबेर पूजन 24 को 
ज्योतिषाचार्य जैन ने बताया कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दीपावली का पर्व मनाया जाता है। इस बार अमावस्या तिथि 24 अक्टूबर और 25 अक्टूबर दो दिन है। 25 तारीख को अमावस्या तिथि प्रदोष काल यानी कि शाम से पहले ही समाप्त हो रही है जबकि 24 अक्टूबर को प्रदोष काल में अमावस्या तिथि रहेगी, इसलिए 24 अक्टूबर को ही पूरे देश में दिवाली मनाई जाएगी। इस बार दोपहर में लक्ष्मी पूजा नहीं हो सकेगी क्योंकि अमावस्या तिथि 5 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगी। इसके बाद ही लक्ष्मी पूजन किया जाएगा।

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