दिया तले अंधेरा, अध्यक्ष क्या बनाया, पूरा उद्यान ही कर दिया बर्बाद

डेढ़ साल में दो बैठकें भी नहीं करवा सके उद्यान समिति के अध्यक्ष कुलदीप गौतम

दिया तले अंधेरा, अध्यक्ष क्या बनाया, पूरा उद्यान ही कर दिया बर्बाद

न पैदल चलने का ट्रेक सही है न लोगों के बैठने की बैंचें।

कोटा। नगर निगम कोटा दक्षिण वार्ड 76 से कांग्रेस पार्षद व उद्यान समिति के अध्यक्ष कुलदीप गौतम का आॅफिस जिस उद्यान में है उसी उद्यान की दुर्दशा हो रही है। अच्छे बने उद्यान के हालात आज बर्बादी के कगार पर पहुंच गए हैं। ना लोगों के पैदल चलने का ट्रेक बचा ना लोगों के बैठने की बैंचे। लोग उद्यान का सामान घरों में ले गए। हालात यह हैं कि  समिति अध्यक्ष बनने के बाद से वे अब तक समिति की दो बैठकें तक नहीं करवा सके हैं।  राज्य की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने नगर निगम कोटा दक्षिण में 22 समितियों का गठन किया था। जुलाई 2022 में गठित उन समितियों में  कांग्रेस पार्षदों को लिया था। हर समिति में एक पार्षद को उसका अध्यक्ष बनाया और 9 अन्य पार्षदों को सदस्य। उसी के तहत वार्ड 76 से पार्षद कुलदीप गौतम को  उद्यान प्रबंध समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया था। निगम की 22 में से जहां अधिकतर समिति अध्यक्षों को बैठने के लिए आॅफिस तक नहीं मिला। वहीं कुलदीप गौतम को चम्बल गार्डन के पास गांधी उद्यान में आॅफिस दिया गया। वहां आॅफिस संबंधी सभी सुविधाएं दी गई। जिससे वे उद्यान में बने आॅफिस से निगम के उद्यानों की दशा सुधारने पर ध्यान दे सकें । लेकिन हालत यह है कि जिस गांधी उद्यान में गौतम का आॅफिस है उसी उद्यान की दुर्दशा हो रही है। 

औषधीय पौधे सूखे, ग्रीन हाउस पर लाखों खर्च
नगर निगम की तत्कालीन आयुक्त ने गांधी उद्यान में औषधीय पौधे लगाए थे। निगम अधिकारियों के साथ ही उद्यान प्रबंध समिति के अध्यक्ष की भी जिम्मेदारी थी कि वह उनकी देखभाल कर उन्हें पनपने में मदद करते। लेकिन उन्होंने उद्यान की सार संभाल पर ध्यान नहीं दिया। जिससे वे पौधे तो सूखकर नष्ट हो गए। जबकि गांधी उद्यान में ही बदहाल हो चुके ग्रीन हाउस को सुधारने पर लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। 

बैठने की बैंच व लाइटें टूटी हुई
गार्डन में घूमने आने वाले लोग जब थक हार कर वहां कुछ समय बैठकर आराम करना चाहते हैं तो उन्हें वहां भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालत यह है कि अधिकतर बैंचे टूटी हुई है। जिससे लोगों को बैठने की पर्याप्त जगह तक नहीं मिल पा रही है।  इतना ही नहीं गार्डन में लगी अधिकतर लाइटें भी खराब व टूटी हुई हैं। जिससे रात के समय वहां अंधेरा रहता है। अंधेरे में महिलाओं व युवतियों के साथ किसी भी तरह की अनहोनी  का खतरा बना रहता है।  इतना ही नहीं डस्टबीन तक टूटे हुए हैं। जिससे लोग कचरा तक उसमें नहीं डाल पा रहे। कचरा गार्डन में डालने से चारों तरफ गंदगी फेल रही है। उद्यान प्रबंध समिति के अध्यक्ष कुलदीप गौतम समिति गठित होने के डेढ़ साल में समिति की दो बैठकें भी नहीं करवा सके। यहां तक की गार्डन की लेबर का पेमेंट तक काफी समय से नहीं हो रहा। उसके लिए भी न तो संवेदक पर और न ही निगम अधिकािरयों पर दबाव बना पा रहे हैं। जिससे सभी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

खुद की गाड़ी अंदर तक, आमजन की बाहर रूकवाई
गार्डन घूृमने आने वालों का कहना है कि पहले गांधी उद्यान में आने वाले लोगों के वाहन अंदर तक जाते थे। लेकिन  कुछ दिन से आमजन के वाहनों को तो मुख्य द्वार के बाहर ही खड़ा करवाया जा रहा है। जबकि उद्यान प्रबंध समिति के अध्यक्ष की गाड़ी अंदर उनके कक्ष तक जा रही है। मुख्य द्वार पर तैनात सुरक्षा गार्ड का कहना है कि समिति अध्यक्ष के आदेश से ऐसा किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि बाहर से यदि गाड़ी चोरी हो गई तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। नहीं किया फोन रिसीव: गांधी उद्यान समेत अन्य गार्डनों की दुर्दशा के संबंध में जानने के लिए उद्यान प्रबंध समिति के अध्यक्ष कुलदीप गौतम को कई बार फोन किए। आॅफिस में भी सम्पर्क की कोािशश की लेकिन उन्होंने न तो फोन रिसीव किया और न ही कोई जवाब आया। 

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फिलहाल कोई काम नहीं हो रहा
मुझे निगम में आए और उद्यान प्रभारी की जिम्मेदारी मिले 4 महीने का समय हुआ है। उसके बाद से ही पहले विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से कोई काम नहीं। उसके बाद सरकार द्वारा निर्माण कार्य पर रोक लगाने से कोई काम नहीं हो सके थे। अब सरकार ने निर्माण कार्यों में शिथिलता दी है। उसके बाद प्रयास करेंगे कि उद्यान में निर्माण व मरम्मत के काम करवाए जा सकेें। 
- अंकित सारस्वत, प्रभारी उद्यान 

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