आजादी के 74 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे ग्रामीण

दर्जनों गांवों में अभी भी पक्की सड़कों का इंतजार : विद्यार्थियों के लिए भी मुश्किलों भरी है शिक्षा की डगर

आजादी के 74 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे ग्रामीण

धूल और कीचड़ भरे कच्चे रास्तों से आवागमन करने को मजबूर लोग।

सांगोद। देश एक ओर जहां आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, वहीं दूसरी ओर हजारों गांवों को अभी तक बुनियादी सुविधाओं का इंतजार है। कई गांवों में आज भी जहां लोग पीने के पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं, वहीं चिकित्सा सुविधाएं और पक्की सड़क तो आज भी ग्रामीणों के लिए किसी सपने से कम नहीं है। ऐसा ही एक गांव है सांगोद उपखंड का खजूरी ओदपुर जिसमें आज भी लोगों को पक्की सड़क का इंतजार है। इस गांव के ग्रामीण आज भी धूल भरी कच्ची सड़क से आवागमन करने को मजबूर हैं। वहीं बारिश में पूरी सड़क कीचड़ में बदल जाती है। इस गांव से कई विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे गांवों व कस्बों में जाना पड़ता है। बरसात के दिनों में कच्ची सड़क पर कीचड़ हो जाता है। जिससे कई बार उनके कपड़े गंदे हो जाते हैं। वहीं इस धूल और कीचड़ भरी सड़क से गुजरना उनके लिए असंभव हो जाता है। कई बार छुट्टी करनी पड़ती है, जिससे उनकी पढ़ाई खराब होती है।

जन प्रतिनिधियों में नहीं है इच्छा शक्ति
ग्रामीणों ने बताया कि यह सम्पर्क सड़क जो खाताखेड़ी गांव से भंग्याखेड़ी तक जाती है, मात्र 2 किलोमीटर लंबी है। लेकिन इतनी कम दूरी के लिए भी अधिकारियों की उदासीनता और जन प्रतिनिधियों में इच्छा शक्ति के अभाव के कारण अधूरी पड़ी हुई है। ग्रामीणों की गुहार पर अभी तक मात्र आश्वासन ही मिले हैं।  ग्रामीणों ने बताया कि भारत में सड़कों का जाल बिछा हुआ है, लेकिन हमारे गांव में अभी तक सड़क की सुविधा नहीं पहुंची है। इस सड़क की फाइलें किन अलमारियों में धूल खा रही हैं, हमें नहीं पता।

कई बार दिए जा चुके हैं ज्ञापन 
ग्रामीणों ने बताया कि गांवों में जब भी कोई जनप्रतिनिधि, विधायक या नेता आते हैं तो इस समस्या से अवगत करवाते हैं। सैंकड़ों बार लिखित में ज्ञापन दिया जा चुका है। जनप्रतिनिधि ज्ञापन लेकर चले जाते हैं। उसके बाद क्या होता है, कुछ पता नहीं। आखिर ग्रामीणों को कब तक ऐसे ही दिलासा दिया जाता रहेगा।

श्वास संबंधी बीमारियों का खतरा 
इस कच्ची सड़क पर वाहनों से धूल के गुबार उड़ते रहते हैं, जिससे कई प्रकार की एलर्जी व श्वास संबंधी बीमारियां फैलने का खतरा मंडराता रहता है। खजूरी ओदपुर के ग्रामीणों का कहना है कि अभी तो जैसे-तैसे आवागमन कर लेते हैं, लेकिन सबसे अधिक परेशानी बरसात के समय होती है। बरसात में आवागमन बिल्कुल बंद हो जाता है। जिससे कई ग्रामीणों को परेशानी होती है। 

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स्कूल जाते समय कीचड़ में गिर जाते हैं बच्चे 
बरसात के दिनों में साइकिलों से व पैदल स्कूल जाने वाले विद्यार्थी कच्ची सड़क पर कीचड़ के कारण गिर कर चोटिल हो जाते हैं। साथ ही उनके कपड़े व किताबें कीचड़ में खराब हो जाते हैं। 

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इनका कहना
खजूरी ओदपुर गांव से खाताखेड़ी गांव तक दो किलोमीटर की सड़क पर खाताखेड़ी, गुलखेड़ी, सांगाहेड़ा, कोलूखेड़ी समेत दर्जनों गांवों के राहगीरों का आवागमन रहता है। बारिश में हालात बहुत खराब हो जाते हैं। स्कूल के बच्चों को भी इसी सड़क से गुजरना पड़ता है। 
- कुलदीप नागर, क्षेत्रवासी

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हमें जरूरत की सामग्री की खरीदारी करने के लिए रोजाना इसी सड़क से आना-जाना पड़ता है। सैंकड़ों वाहनों का इस सड़क पर आवागमन रहता है। फिर भी अधिकारी इस सड़क को लेकर उदासील हैं। कई लोगों को गिर कर चोटिल होते देखा है। आजादी के अमृत काल में सड़कों की ऐसी दुर्दशा देखना दुर्भाग्यपूर्ण है।
- दिनेश मीणा, ग्रामीण

सड़क निर्माण का काम पीडब्ल्यूडी व सरकार का है। सरकार को पक्की सड़क बनाकर ग्रामीणों को जल्द राहत देनी चाहिए।
- सुशीला कंवर, सरपंच, अमृतकुआं

इस सड़क की अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। अभी आचार संहिता लगी हुई है। आगे जो भी नई जानकारी मिलेगी, बता दी जाएगी।
- भूपेन्द्र कुमार, एईएन, पीडब्ल्यूडी

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