योगी सरकार कैबिनेट में बड़ा फेरबदल संभव, मायावती ने कहा- मंत्रिमंडल का घटाना-बढ़ाना सत्तारूढ़ दल का आंतरिक राजनीतिक विषय
मायावती का प्रहार: मंत्रिमंडल विस्तार या केवल 'राजनीतिक जुगाड़'?
बसपा प्रमुख मायावती ने यूपी मंत्रिमंडल विस्तार को सत्तारूढ़ दल का आंतरिक मामला बताया, लेकिन चेताया कि यदि इससे गरीबों और युवाओं का भला नहीं हुआ, तो यह केवल संसाधनों पर बोझ होगा। उन्होंने लखनऊ में भाजपा नेता पर हमले का जिक्र करते हुए कानून-व्यवस्था और ब्राह्मण समाज की असुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की।
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश में रविवार को हुये मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मंत्रिमंडल का घटाना-बढ़ाना और विस्तार सत्तारूढ़ दल का आंतरिक राजनीतिक विषय होता है, इसलिए इस पर ज्यादा टिप्पणी करना उचित नहीं है लेकिन इसका असर आमजन, खासकर गरीबों, मजदूरों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के जीवन पर सकारात्मक रूप से दिखना चाहिए।
बसपा प्रमुख ने सोमवार को एक्स पर लिखा, “सरकार और मंत्रियों के कामकाज में समाज के हर वर्ग, विशेषकर कमजोर तबकों की जान-माल और मजहब की सुरक्षा सुनिश्चित होती दिखाई देनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो लोग इसे केवल “राजनीतिक जुगाड़” और सरकारी संसाधनों पर बढ़ा बोझ मानेंगे।” उन्होने कहा, “सरकारों और मंत्रियों की पहली संवैधानिक जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सभी वर्गों को न्याय व सुरक्षा का एहसास कराना है। यह व्यवस्था सरकार के कामकाज में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होनी चाहिए।”
बसपा सुप्रीमो ने हाल ही में लखनऊ में ब्राह्मण समाज से जुड़े भाजपा के एक युवा नेता पर हुए जानलेवा हमले का भी जिक्र करते हुये कहा कि इस घटना के बाद प्रदेश में कानून-व्यवस्था और ब्राह्मण समाज की सुरक्षा को लेकर फिर चर्चा शुरू हो गई है। प्रदेश में ब्राह्मण समाज खुद को उपेक्षित और असुरक्षित महसूस कर रहा है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने अपनी पिछली सरकार के कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि बसपा की सरकारों में “सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय” की नीति के तहत समाज के हर वर्ग को न्याय और सुरक्षा देने का प्रयास किया गया था। बेहतर कानून-व्यवस्था और सभी वर्गों की सुरक्षा बसपा सरकारों की पहचान रही है।

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