झांसी मंडल के बिजरौथा-जखौरा-दैलवरा खंड में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली शुरू, अब यात्रियों को मिलेगा अधिक सुरक्षित व समयबद्ध रेल संचालन का लाभ 

कठिन भू-भाग में एक बड़ी उपलब्धि 

झांसी मंडल के बिजरौथा-जखौरा-दैलवरा खंड में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली शुरू, अब यात्रियों को मिलेगा अधिक सुरक्षित व समयबद्ध रेल संचालन का लाभ 
महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के मार्गदर्शन में उत्तर मध्य रेलवे ने नई ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल प्रणाली लागू की। इससे ट्रेनों की लाइन क्षमता, पंक्चुअलिटी और सुरक्षा बढ़ी है। बिजरौथा, जखौरा, दैलवरा स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग उन्नत हुई। 120 ट्रैक डिटेक्शन उपकरण और उन्नत सिग्नलों से मानवीय त्रुटियां कम होंगी। इस वित्तीय वर्ष में 9 ब्लॉक सेक्शन चालू किए गए।

प्रयागराज। महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के कुशल मार्गदर्शन तथा प्रधान मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता सतेंद्र कुमार, मुख्य सिग्नल, दूरसंचार अभियंता (प्रोजेक्ट-2) भोलेन्द्र सिंह और समस्त मुख्यालय की टीम के सक्रिय सहयोग से इस नई तकनीक से अब ट्रेनें एक-दूसरे के पीछे कम दूरी पर भी सुरक्षित रूप से चलाई जा सकेंगी, जिससे खंड की लाइन क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों की पंक्चुअलिटी में सुधार होगा। साथ ही इस तकनीक से ट्रेन संचालन के दौरान मानवीय त्रुटियों की संभावना कम हो जाएगी, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और अधिक सुनिश्चित हो सकेगी।

इस परियोजना के तहत कुल दो ब्लॉक सेक्शन एक ही दिन में चालू किए गए, जो कठिन भू-भाग में एक बड़ी उपलब्धि है। तीन प्रमुख स्टेशनों (बिजरौथा, जखौरा, दैलवरा) पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली को उन्नत किया गया, जिससे सिग्नल संचालन और अधिक सटीक एवं तेज हुआ है। इस खंड में 120 अत्याधुनिक ट्रैक डिटेक्शन उपकरण लगाए गए हैं, जो ट्रेन की स्थिति का सटीक पता लगाते हैं और सिग्नलिंग को और अधिक भरोसेमंद बनाते हैं। इसके अतिरिक्त तेरह सिग्नलों को अपग्रेड करके अब उन्हें चार पहलू वाला बनाया गया है, जिससे लोको पायलट को दूर से ही स्पष्ट संकेत मिलते हैं और ट्रेन की गति व नियंत्रण में सुधार होता है। इसके अलावा इस खंड में स्थित नॉन इंटरलॉक समपार फाटक संख्या-338 और 333 को भी ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल प्रणाली के अनुरूप इंटरलॉक  किया गया है, जिससे फाटक पार करने वाले राहगीरों और सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और बेहतर हो गई है। इस वित्तीय वर्ष में अभी तक कुल 9 ब्लॉक सेक्शन चालू किए गए जा चुके हैं। सिथौली से बिरलानगर, बानमोर से मुरेना तक नवंबर-2025 में, मुरैना-सिकरोदा-हितमपुर सेक्शन दिसंबर 2025 में, दैलवारा-ललितपुर-जीरोन सेक्शन ललितपुर यार्ड रीमॉडलिंग सहित जो झांसी की निर्माण इकाई की ओर से की जा रही है, दिसंबर में पूरी करने की योजना है।  

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