मोटर दुर्घटना मामलों में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : देरी से क्लेम अब नहीं होंगे खारिज, न्याय का उद्देश्य पीड़ितों को राहत देना है, न कि अधिकारों को सीमित करना
पीड़ितों को बड़ी राहत: हाईकोर्ट ने क्लेम खारिज करने पर लगाई रोक
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि देरी के आधार पर मोटर दुर्घटना क्लेम खारिज नहीं होंगे। न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने स्पष्ट किया कि तकनीकी कारणों से पीड़ितों को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने ट्रिब्यूनल को सुनवाई जारी रखने का निर्देश देकर सैकड़ों परिवारों को बड़ी उम्मीद दी है।
बिलासपुर। मोटर दुर्घटना दावा मामलों में उच्च न्यायालय ने पीड़ित परिवारों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। गुरुवार को हुई इस सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल आवेदन में देरी होने के आधार पर क्लेम को शुरुआती स्तर पर खारिज नहीं किया जा सकता, उक्त जानकारी आज अदालत ने दी। न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने यह आदेश पारित करते हुए कहा कि पीड़ितों को सिर्फ तकनीकी कारणों के चलते न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता। इस फैसले से प्रदेश के उन सैकड़ों परिवारों को राहत मिली है, जो किसी कारणवश तय समय सीमा के भीतर दावा प्रस्तुत नहीं कर सके थे।
दरअसल, बजाज आलियांज, टाटा एआईजी, ओरिएंटल, मैग्मा एचडीआई और इफको टोक्यो जैसी बीमा कंपनियों के साथ कुछ वाहन मालिकों ने 40 से अधिक सिविल रिवीजन याचिकाएं दायर की थीं। इनमें तर्क दिया गया था कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 166(3) के तहत समय सीमा समाप्त होने के बाद ट्रिब्यूनल को ऐसे मामलों की सुनवाई का अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि न्याय का उद्देश्य पीड़ितों को राहत देना है, न कि तकनीकी आधार पर उनके अधिकारों को सीमित करना।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बीमा कंपनियां और संबंधित पक्ष सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के अंतिम निर्णय को ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। अदालत ने सभी मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल्स को निर्देश दिया है कि वे इन मामलों की सुनवाई कानून के अनुसार जारी रखें। साथ ही यह भी कहा गया है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट से अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक ट्रिब्यूनल कोई अंतिम आदेश पारित नहीं करेंगे।

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