केंद्र सरकार ने कहा-भारत के ऊर्जा हितों की रक्षा उसकी प्राथमिकता: विपक्ष का राज्ययसभा से बहिर्गमन

पश्चिम एशिया संकट पर जयशंकर का कड़ा रुख

केंद्र सरकार ने कहा-भारत के ऊर्जा हितों की रक्षा उसकी प्राथमिकता: विपक्ष का राज्ययसभा से बहिर्गमन

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा हितों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विपक्ष ने ऊर्जा सुरक्षा और गैस की बढ़ती कीमतों पर नियम 176 के तहत चर्चा की मांग करते हुए वॉकआउट किया। सरकार स्थिति का निरंतर आकलन कर रही है।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि वह पश्चिम एशिया में उत्पन्न स्थिति का निरंतर आकलन कर रही है और इस क्षेत्र के देशों में भारतीयों की सुरक्षा, उनकी सकुशल वापसी तथा देश के ऊर्जा हितों की रक्षा करना उसकी प्राथमिकता है जबकि विपक्ष ने इस स्थिति के कारण देश के समक्ष ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों पर नियम 176 के तहत चर्चा कराने की मांग को लेकर सदन से बहिर्गमन किया। विदेश मंत्री डा एस जयशंकर के पश्चिम एशिया तथा खाड़ी देशों की स्थिति के भारत पर प्रभाव के बारे में स्वत: दिये जाने वाले वक्तव्य से पहले विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने इस स्थिति के कारण देश में ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों के मुद्दे पर नियम 176 के तहत सदन में चर्चा कराये जाने की मांग की। नेता सदन जगत प्रकाश नड्डा ने कांग्रेस के रवैये को गैर जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि इनकी रूचि ने देश हित में है और न ही चर्चा में, बस इनकी रूचि केवल हुड़दंग मचाने में है। 

नेता विपक्ष की मांग के तुरंत बाद डॉ. जयशंकर ने विपक्ष के भारी शोर शराबे के बीच अपने वक्तव्य में पश्चिम एशिया की स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि सरकार अमरीका और इजरायल की ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद से स्थिति का निरंतर आकलन कर रही है और सभी संबंधित पक्षों के निरंतर संपर्क में है। उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण इस मामले में मुख्य रूप से तीन बिन्दुओं पर आधारित है पहला सभी मुद्दों का समाधान बातचीत से हो, क्षेत्र में तनाव कम करने के कदम उठाये जायें, आम लोगों पर हमले न किये जायें। दूसरा क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और सकुशल वापसी सरकार की प्राथमिकता है और तीसरा देश के राष्ट्रीय और ऊर्जा हितों की रक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जायेगा। 

इससे पहले खरगे ने ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए इस पर नियम 176 के तहत सदन में चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में स्थिति निरंतर बदल रही है और भारत भी इससे प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरत का 55 प्रतिशत इस क्षेत्र से पूरा होता है और यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका असर भारत की आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि रसोई गैस सिलेंडर पहले ही 60 रुपये महंगा हो गया है। 

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भारत के करीब एक करोड़ लोग हैं और उनकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के कुछ लोगों के मारे जाने तथा कुछ के लापता होने की घटनाएं सामने आयी हैं। नेता विपक्ष ने कहा कि सरकार को सदन में इन सभी मुद्दों पर चर्चा करानी चाहिए। 

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