अखिलेश यादव ने साधा निशाना : संविधान संशोधन विधेयक के सहारे सत्ता की राजनीति कर रही सरकार, एसआईआर के जरिए वोट काटने का लगाया आरोप
संसदीय प्रहार: अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण और परिसीमन को घेरा
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लोकसभा में सरकार पर तीखा हमला करते हुए महिला आरक्षण को परिसीमन लागू करने की 'साजिश' बताया। उन्होंने जातिगत जनगणना और मुस्लिम व पिछड़ी महिलाओं के लिए 'कोटे में कोटा' की मांग की। अखिलेश ने आरोप लगाया कि सरकार वोट बैंक के लिए संवैधानिक संशोधन का सहारा ले रही है।
नई दिल्ली। समाजवाद पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा है कि केंद्र सरकार सत्ता में बने रहने के लिए संविधान में 131वें संशोधन के जरिए वह महिला आरक्षण विधेयक के सहारे परिसीमन संबंधी विधेयक को पारित करवाना चाहती है। अखिलेश यादव ने गुरुवार को लोकसभा में "संविधान 131 वां संशोधन विधेयक 2026" पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि केंद्र सरकार आरक्षण विरोधी है इसलिए वह एसआईआर के जरिए घपले करवा कर सत्ता में बना रहना चाहती है। एसआईआर के माध्यम से वोट काटे जा रहे हैं और जब पकड़े जा रहे हैं तो फिर नयी तरकीब लगा कर वोट काटे जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार एसआईआर के जरिए लोगों के वोट कटवा रही है और ऐसा कर केंद्र सरकार चुनाव आयोग के साथ मिलकर वोट बैंक सुरक्षित करने की राजनीति कर रही है। उनका यह भी कहना था कि उत्तर प्रदेश में एसआईआर के जरिये वोट काटे गए और जब पकड़े गए तो फॉर्म 7 लेकर उसमें नकली दस्तखत करवाए गये लेकिन इसमें भी पकड़े गए तो फॉर्म 7 का इस्तेमाल ही बंद करवा दिया गया। अब केंद्र सरकार महिला आरक्षण विधेयक के जरिए महिलाओं के वोट पाकर सत्ता में बना रहना चाहती है और अपने खोए वोट को वापस पाना चाहती है लेकिन उसे मालूम होना चाहिए कि देश की महिलाएं महंगाई से त्रस्त हैं और अब एलपीजी सिलेंडर ने उनकी नाराजगी और बढ़ा दी है इसलिए महिलाओं को रिझाकर उनका वोट हासिल करने का उनका षड्यंत्र भी बेकार हो गया है।
सपा नेता ने कहा कि अगर केंद्र सरकार महिलाओं के प्रति संवेदनशील है तो उसे मेरठ और नोएडा की आंदोलन कर रही महिलाओं की समस्याओं की समस्या के समाधान के लिए कदम उठाने चाहिए और इस तरह का संकट महिलाओं के सामने फिर ना आए विधेयक में इसकी व्यवस्था करनी चाहिए। उनका कहना था कि सरकार महिला आरक्षण के सहारे रणनीतिक तरीके से राजनीतिक लाभ पाने के लिए परिसीमन के वास्ते संविधान संशोधन विधयेक लेकर आई है।
सपा नेता ने कहा कि पहले जाति के आधार पर जनगणना आवश्यक है यदि जनगणना होती है तो उसके आधार पर आरक्षण की व्यवस्था की जा सकती है लेकिन सरकार आरक्षण नहीं देना चाहती इसलिए वह जनगणना जाति के आधार पर नहीं करना चाहती है। वह अल्पसंख्यकों और खासकर मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण का लाभ नहीं देना चाहती है। यदि जनगणना जाति के आधार पर होती है तो पिछड़े वर्ग तथा अल्पसंख्यक महिलाओं को इसका वाजिब लाभ मिल सकता है।
अखिलेश यादव ने कहा कि यदि सरकार जनगणना जाति के आधार पर नहीं करती है तो फिर महिला आरक्षण विधेयक धोखा है। उनका कहना था कि विधेयक में महिलाओं के हित के लिए कोई व्यवस्था ही नहीं है और पिछड़े अल्पसंख्यक महिलाओं को आरक्षण मिले बिना आरक्षण विधेयक का कोई मतलब नहीं रह जाता है।

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