संसद में केंद्र का जवाब: मोदी की इज़रायल यात्रा के दौरान ईरान पर सैन्य कार्रवाई पर नहीं हुई चर्चा, इन संवादों का उद्देश्य बातचीत और कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करना
पीएम मोदी और नेतन्याहू के बीच नहीं हुई ईरान हमले पर चर्चा
संसद में सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान ईरान पर सैन्य कार्रवाई को लेकर कोई बात नहीं हुई। इस दौरे में AI और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते हुए। विदेश मंत्रालय के अनुसार, संघर्ष के बीच अब तक 4.75 लाख भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।
नई दिल्ली। सरकार ने गुरुवार को संसद को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पिछली इजरायल यात्रा के दौरान दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच ईरान पर उसके दो दिन बाद हुई सैन्य कार्रवाई के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई थी। सरकार ने राज्यसभा में एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी है। इसमें बताया गया है कि श्री मोदी की फरवरी के अंत में हुई इजरायल की आधिकारिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौते और समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये गये, लेकिन ईरान पर बाद में हुए सैन्य हमले को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।
सांसद अब्दुल वहाब के प्रश्न के लिखित उत्तर में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 25–26 फरवरी 2026 को अपने इजरायली समकक्ष के निमंत्रण पर यह दौरा किया था। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं के साथ-साथ प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। उत्तर में कहा गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, कृषि, मत्स्य पालन और जलीय कृषि, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, डिजिटल भुगतान और श्रमिकों की आवाजाही सहित कई क्षेत्रों में अनेक समझौते, समझौता ज्ञापन, प्रोटोकॉल और आशय पत्रों पर हस्ताक्षर हुए।
दौरे के दो दिन बाद ईरान पर सैन्य हमले को लेकर जतायी गयी चिंताओं के बारे में मंत्री ने कहा कि उच्च स्तरीय बैठकों के दौरान इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई। पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर भारत की प्रतिक्रिया के बारे में सरकार ने कहा कि वह घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाये हुए हुए है और क्षेत्रीय हितधारकों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है। प्रधानमंत्री ने इजरायल, ईरान, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन और अमेरिका सहित कई देशों के नेताओं से बातचीत की है। विदेश मंत्री ने भी इजरायल, ईरान, अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद के देशों में अपने समकक्षों के साथ परामर्श किया है।
सरकार ने बताया कि इन संवादों का उद्देश्य बातचीत और कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करना रहा है। इस दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष फोकस किया गया है। क्षेत्रीय नेताओं से भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर आश्वासन भी प्राप्त हुए हैं। उत्तर में बताया गया है कि विदेश मंत्रालय ने संघर्ष प्रभावित क्षेत्र में भारतीय समुदाय की सुरक्षा के लिए सक्रिय रूप से कदम उठाये हैं। भारतीय दूतावास और मिशन नियमित परामर्श जारी कर रहे हैं, चौबीसों घंटे सेवा देने वाले नियंत्रण कक्ष स्थापित किये गये हैं और आपातकालीन सहायता प्रदान की जा रही है।
मंत्री ने कहा, "इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, संघर्ष की शुरुआत से अब तक 4.75 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित रूप से देश लौट चुके हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि भारत ऊर्जा, उर्वरक और अन्य आवश्यक आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने पर काम कर रहा है, और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से रसोई गैस लाने वाले जहाजों तथा अन्य पोतों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की गयी है।

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