कर्नाटक में ऑटो चालक ने अपने वाहन को छोटी लाइब्रेरी में किया तब्दील : यात्रियों को मिलता है सफर एक दिलचस्प और ज्ञानवर्धक अनुभव, लोगों को मोबाइल से दूर कर पढ़ने की आदत से जोड़ना मकसद
यात्रियों को अक्सर सड़क पर लंबा समय बिताना पड़ता है
ऑटो चालक अक्षय चकालब्बेदी ने अपने रिक्शा को मिनी लाइब्रेरी में बदलकर अनोखी पहल की है। ट्रैफिक में फंसे यात्रियों के लिए अब सफर ज्ञानवर्धक बन गया है। ऑटो में रखी किताबें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती हैं, मोबाइल से दूरी बनाती हैं। सोशल मीडिया पर यह “चलती-फिरती लाइब्रेरी” खूब सराही जा रही है।
बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से दिल को छू लेने वाली एक पहल वायरल हो रही है। महानगर के एक ऑटो-रिक्शा चालक ने अपने वाहन को एक छोटी लाइब्रेरी में तब्दील कर दिया है। इससे यात्रियों के लिए रोजाना का सफर एक दिलचस्प, ज्ञानवर्धक और समृद्ध करने वाला अनुभव बन गया है। इस पहल से एक ओर व्यक्तिगत रुचि की पूर्ति होती है, वहीं दूसरी ओर इससे सांस्कृतिक जागरूकता भी आती है। रिपोर्टों के मुताबिक 26 अप्रैल को बेंगलुरु में अक्षय चकालब्बेदी ने यह अनोखा आइडिया पेश किया। बेंगलुरु एक ऐसा शहर है, जो अपने भारी जाम के लिए जाना जाता है, जहां यात्रियों को अक्सर सड़क पर लंबा समय बिताना पड़ता है।
अक्षय ने सफर की रोजमर्रा की बोरियत को तोड़ते हुए अपने ऑटो-रिक्शा के अंदर एक छोटा सा बुकशेल्फ लगाया है। इसमें साहित्य और मोटिवेशनल किस्म की कई तरह की पुस्तकें सजाई हुई हैं। यात्रियों को सफर के दौरान कोई भी किताब उठाकर पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे यह सफर सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह जाना ही नहीं, बल्कि एक सार्थक अनुभव बन जाता है। इस पहल में कुछ और भी अच्छी चीजें शामिल हैं। इस कोशिश का मकसद लोगों को उनके मोबाइल से दूर करके पढ़ने की आदत को फिर से जोड़ना है, भले ही यह थोड़े समय के लिए ही क्यों न हो।
इस ऑटो लाइब्रेरी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं। उपभोक्ता इसकी खूब तारीफ कर रहे हैं और इसे चलता-फिरता स्कूल और पहियों पर ज्ञान का कोना बता रहे हैं। कई लोगों ने चालक की रचनात्मकता और उसके इरादे की सराहना की है। उनका कहना है कि ऐसे छोटे लेकिन असरदार आइडिया रोजमर्रा की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। यह कहानी दिखाती है कि कैसे एक आम इंसान का एक छोटा सा नया आइडिया आम अनुभवों को एक नया रूप दे सकता है और दूसरों को प्रेरित कर सकता है। यह इस बात को भी रेखांकित करती है कि सार्थक बदलाव की शुरुआत अक्सर छोटे-छोटे कदमों से ही होती है।

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