खामेनेई की मौत के बाद कश्मीर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन: श्रीनगर सहित घाटी में सुरक्षा कड़ी, हिंसक झड़पों में 10 लोग घायल
कश्मीर में तनाव: खामेनेई की मौत पर प्रदर्शन
ईरानी नेता खामेनेई की मौत के विरोध में कश्मीर घाटी में लगातार दूसरे दिन तनाव बना रहा। श्रीनगर सहित कई हिस्सों में पाबंदियां और इंटरनेट निलंबन लागू है। जिसके बाद प्रशासन ने शांति की अपील की है। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती कर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
श्रीनगर। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिकी-इजरायली हमलों में मौत के बाद कश्मीर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी रहे और श्रीनगर सहित घाटी के कई हिस्सों में लगातार दूसरे दिन भी पाबंदियां लागू रहीं। कश्मीर में रविवार से ही ईरान के समर्थन में और अमेरिका-इज़रायल के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। पहले दिन प्रदर्शन ज़्यादातर शांतिपूर्ण रहे और अधिकारियों ने रैलियों की इजाज़त दे दी थी, लेकिन सोमवार को स्थिति तनावपूर्ण हो गयी जब महिलाओं समेत सैकड़ों लोगों ने पाबंदियों को तोड़कर प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। कई जगहों पर हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें सुरक्षाकर्मियों सहित 10 से ज्यादा लोग घायल हो गये।
श्रीनगर और दूसरे संवेदनशील इलाकों में मंगलवार को सख्त पाबंदियां लगाने के लिए पुलिस और केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल की भारी तैनाती जारी रही। शहर के मुख्य केन्द्र खासकर लालचौक में भीड़ जमा होने से रोकने के लिए बैरिकेड्स लगाकर रास्ते बंद किये गये। सूत्रों ने बताया कि एहतियात के तौर पर कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गयी थीं।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी हालात पर करीब से नज़र रखे हुए हैं ताकि स्थिति बिगड़ने से रोकी जा सके। जम्मू-कश्मीर पुलिस और प्रशासन ने शांति और संयम की अपील की है। एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा, "प्रशासन कश्मीर घाटी में शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सभी समुदायों की भूमिका को मानता है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे संयम बरतें, स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर केवल सत्यापित जानकारी ही साझा करें।"
किसी भी मदद के लिए श्रीनगर में चौबीसों घंटे हेल्पलाइन (0194-2740003) भी शुरू की गयी है। पुलिस ने कहा कि वे नागरिकों के कानूनी तरीकों से शांति से अपनी बात कहने के अधिकार का सम्मान करते हैं, लेकिन चेतावनी दी कि दंगा, पत्थरबाजी, झड़प और कानून व्यवस्था में रुकावट की घटनाएं मंज़ूर नहीं हैं।

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