सबरीमाला विवाद: भाजपा ने की नए हलफनामे की मांग, मुख्यमंत्री विजयनन के घर के सामने अयप्पा ज्योति जलाएगी पार्टी
भाजपा आज केरल मुख्यमंत्री आवास के सामने जलाएगी 'अयप्पा ज्योति'
महिलाओं में प्रवेश को लेकर बड़ा राजनीतिक कदम। भाजपा ने की मुख्यमंत्री के आवास के सामने अयप्पा ज्योति जलाने की घोषणा। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु लेंगे भाग। सरकार पर सबरीमाला मुद्दे पर रुख स्पष्ट करने का दवाब। माकपा के राज्य सचिव के खिलाफ टिप्पणियां वापस लेने की मांग।
तिरुवनंतपुरम। सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े मुद्दे पर बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार शाम पांच बजे मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास के सामने अयप्पा ज्योति जलाने की घोषणा की है। पार्टी ने मांग की है कि पहले राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय में दाखिल अपना हलफनामा वापस ले और मंदिर परंपराओं तथा श्रद्धालुओं के समर्थन में नया हलफनामा दाखिल करे।
भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य पीके कृष्णदास ने कहा कि कार्यक्रम में हजारों अयप्पा श्रद्धालु और पार्टी कार्यकर्ता भाग लेंगे। उन्होंने बताया कि पार्टी सरकार पर दबाव बना रही है कि वह सबरीमाला मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करे और अनुष्ठानों तथा परंपराओं की रक्षा के पक्ष में कदम उठाए।
उन्होंने कहा कि सबरीमाला के प्रवेश द्वार माने जाने वाले चेंगन्नूर में अयप्पा संरक्षण संगमम भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री और राज्य सरकार से हृदय परिवर्तन की अपील की जाएगी। आने वाले दिनों में भाजपा राज्य के 23,000 से अधिक बूथों पर इसी तरह के कार्यक्रमों और अयप्पा ज्योति प्रज्वलन का आयोजन करेगी।
कृष्णदास ने माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्य सचिव एमवी गोविंदम से तंत्री के खिलाफ की गयी टिप्पणियां वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत द्वारा सबूतों के अभाव में जमानत दिए जाने के बावजूद तंत्री के खिलाफ मानहानिकारक बयान दिए गए।
उन्होंने सबरीमाला से जुड़े स्वर्ण चोरी मामले में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच की भी मांग की। उनका आरोप है कि एसआईटी की जांच ठप पड़ी है और मुख्यमंत्री ने जांच में हस्तक्षेप किया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मामले को उच्च राजनीतिक स्तर तक पहुंचने से रोकने के लिए सत्तारूढ़ और विपक्षी नेतृत्व के बीच राजनीतिक समझ बनी हुई है।
भाजपा नेता ने मंदिर परंपराओं के कथित उल्लंघन के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले अयप्पा श्रद्धालुओं पर दर्ज मामलों को वापस लेने की भी मांग की और राज्य सरकार तथा माकपा पर अयप्पा विरोधी रुख अपनाने का आरोप लगाया।

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