सरकारी ठेकों के मामले में अरूणाचल सीएम खांडू का सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका : सीबीआई जांच के आदेश, पढ़ें पूरा मामला

पेमा खांडू की बढ़ी मुश्किलें: 1,270 करोड़ के ठेका विवाद में CBI जांच के आदेश

सरकारी ठेकों के मामले में अरूणाचल सीएम खांडू का सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका : सीबीआई जांच के आदेश, पढ़ें पूरा मामला

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों को 1,270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके देने के आरोपों की CBI जांच का निर्देश दिया है। 2015 से 2025 के बीच हुई अनियमितताओं की जांच 16 हफ्तों में पूरी होगी, जिससे राज्य की राजनीति में हड़कंप मच गया है।

अरूणाचल प्रदेश। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू पर मुश्किलों के बादल मंडराने लगे है क्योंकि सरकारी ठेका आवंटन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनको बड़ा झटका दिया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों को सरकारी ठेके देने के आरोपों की जांच के लिए सीबीआई को निर्देश जारी किए हैं। बता दें कि यह विवाद करीब 1,270 करोड़ रुपये के ठेकों में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसमें सीएम पेमा खांडू परिवार की चार कंपनियों के शामिल होने का आरोप है। 

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने और जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करने का आदेश जारी किया है और साथ ही मुख्य सचिव को समन्वय के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का भी आदेश दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी तरह का रिकॉर्ड नष्ट नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, सीबीआई नवंबर 2015 से 2025 के बीच दिए गए ठेकों और उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया की भी शुरूआत से जांच करेगी। कोर्ट ने आगे कहा कि इस दौरान सीबीआई विशेष रूप से उन मामलों की पड़ताल करेगी, जिनमें याचिकाकर्ताओं ने अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। 

इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर आदेश का पालन करने का भी आदेश जारी किया है। याचिका में दावा किया गया है कि इस अवधि में करीब 1,245 करोड़ रुपये के ठेके मुख्यमंत्री की पत्नी, माता और भतीजे से जुड़ी फर्मों को बिना उचित प्रक्रिया के दिए गए। इस याचिका में तवांग से विधायक त्सेरिंग ताशी की कंपनी का भी नाम शामिल है। कोर्ट ने सीबीआई को 16 सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा है, जिससे यह तय किया जा सके कि आगे स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है या नहीं।

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