केरल भाजपा ने की श्रमिक कल्याण कोष से 2,899 करोड़ रुपये के डायवर्जन के जांच की मांग, औद्योगिक विकास के दावों पर उठाए सवाल

केरल में निधि घोटाला? ₹2,899 करोड़ के डायवर्जन पर भाजपा हमलावर

केरल भाजपा ने की श्रमिक कल्याण कोष से 2,899 करोड़ रुपये के डायवर्जन के जांच की मांग, औद्योगिक विकास के दावों पर उठाए सवाल

केरल भाजपा ने श्रमिक कल्याण निधि से ₹2,899 करोड़ के कथित डायवर्जन की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। प्रदेश महासचिव एस. सुरेश ने राज्य सरकार पर पेंशन रोकने और केंद्रीय स्वास्थ्य बजट का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने मुथलापोझी बंदरगाह पर मौतों और औद्योगिक विकास के झूठे दावों को लेकर मुख्यमंत्री से जवाब मांगा है।

तिरुवनंतपुरम। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केरल इकाई ने श्रमिक कल्याण निधियों से कथित तौर पर 2,899.35 करोड़ रुपये के व्यपवर्तन (डायवर्जन) की जांच की मांग की है। भाजपा के प्रदेश महासचिव एस सुरेश ने राज्य श्रम मंत्रालय से इस मुद्दे पर जवाब मांगा और पूछा कि श्रमिकों के कल्याण, विशेषकर पेंशन के लिए निर्धारित इतनी बड़ी राशि को किस प्रकार अन्यत्र खर्च किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार पेंशन भुगतान लंबित रखकर श्रमिकों के साथ अन्याय कर रही है और इसके लिए मुख्यमंत्री तथा श्रम मंत्री को जिम्मेदार ठहराया।

भाजपा ने अपने दावों के समर्थन में सूचना के अधिकार (आरटीआई) के दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि केन्द्र सरकार ने पिछले 10 वर्षों में स्वास्थ्य अवसंरचना के लिए 10,605.72 करोड़ रुपये और रखरखाव के लिए 2,048.95 करोड़ रुपये आवंटित किए, लेकिन इसके ठोस परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख करते हुए पूछा कि 70 वर्ष से अधिक आयु के कितने पात्र लोगों को इसका लाभ मिला और क्या इसके लिए पर्याप्त जागरूकता अभियान चलाये गये।

उन्होंने मत्स्य क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न मछली बंदरगाहों के लिए केन्द्र द्वारा 1,195 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गयी, जिसमें मुथलापोझी बंदरगाह के लिए 177 करोड़ रुपये शामिल हैं, फिर भी वहां दुर्घटनाएं और मौतें जारी हैं। वहीं, तिरुवनंतपुरम के मेयर वी वी राजेश ने राज्य के औद्योगिक विकास के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2016 से 2025 के बीच केवल दो परियोजनाएं ही 1,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश के साथ साकार हो सकीं। उन्होंने यह भी कहा कि 4.5 लाख औद्योगिक इकाइयों के दावे के विपरीत आंकड़े काफी कम हैं और कई परियोजनाएं बंद हो चुकी हैं।

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