अमेरिका ने ईरान के खार्ग द्वीप पर सैन्य ठिकानों पर की बमबारी : अधिकांश कच्चे तेल के निर्यात का यहीं से होता है संचालन, 60 से अधिक जहाजों तथा 30 बारूदी सुरंग बिछाने वाले पोतों को नुकसान

देश के लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात होता है

अमेरिका ने ईरान के खार्ग द्वीप पर सैन्य ठिकानों पर की बमबारी : अधिकांश कच्चे तेल के निर्यात का यहीं से होता है संचालन, 60 से अधिक जहाजों तथा 30 बारूदी सुरंग बिछाने वाले पोतों को नुकसान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खार्ग द्वीप के सैन्य ठिकानों पर बमबारी की। यह द्वीप ईरान के 90% तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है। ट्रंप ने तेल रिफाइनरियों को निशाना नहीं बनाया, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। ईरान ने हमले से रक्षा तंत्र को नुकसान से इनकार किया।

 वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खार्ग द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों पर बमबारी की है। यह द्वीप ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केन्द्र के रूप में जाना जाता है और देश के अधिकांश कच्चे तेल के निर्यात का संचालन यहीं से होता है। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया मंच पर कहा कि उन्होंने खार्ग द्वीप के तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाने का निर्णय लिया है, हालांकि यदि ईरान या कोई अन्य पक्ष होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के सुरक्षित और मुक्त आवागमन में बाधा डालने की कोशिश करता है, तो वह अपना फैसला बदल सकते हैं। विशेषज्ञों के हवाले से एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की किसी भी कोशिश के लिए बड़ी संख्या में जमीनी सैनिकों की आवश्यकता होगी, जिसे लेकर अमेरिकी प्रशासन अब तक अनिच्छुक रहा है। फारस की खाड़ी में ईरान के तट से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित खार्ग द्वीप से देश के लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात होता है।

पेंटागन के प्रेस सचिव किंग्सले विल्सन ने बताया कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों में 50 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिक सहयोग कर रहे हैं। अमेरिकी केन्द्रीय कमान के अनुसार अब तक लगभग छह हजार लक्ष्यों पर हमले किए जा चुके हैं और 60 से अधिक जहाजों तथा 30 बारूदी सुरंग बिछाने वाले पोतों को नुकसान पहुंचाया गया है या फिर नष्ट कर दिया गया है। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका युद्धपोत यूएसएस ट्रिपोली और लगभग 2500 मरीन सैनिकों को भी पश्चिम एशिया  भेज रहा है। इन बलों के एक से दो सप्ताह के भीतर क्षेत्र में पहले से तैनात अमेरिकी सैन्य संसाधनों के साथ जुडऩे की संभावना है। इसके अलावा कुछ युद्धपोतों और एफ-35 लड़ाकू विमानों की तैनाती भी की जा रही है, ताकि क्षेत्र में पहले से मौजूद अमेरिकी सैन्य बलों को और मजबूत किया जा सके।

इस बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने एक बयान में ट्रंप के उन दावों को खारिज कर दिया, जिनमें उन्होंने कहा था कि द्वीप के रक्षा तंत्र पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं। आईआरजीसी ने इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने लगभग 15 जगहों को निशाना बनाया था, जिनमें ईरानी सेना के हवाई रक्षा ठिकाने, जोशन नौसैनिक अड्डा, हवाई अड्डे का वॉचटावर (पेहरे की मिनार) और एक हेलीकॉप्टर पैड शामिल थे लेकिन साथ ही यह भी दावा किया कि द्वीप के रक्षा तंत्र एक घंटे के भीतर ही फिर से काम करने लगे। आईआरजीसी ने इस बात पर भी जोर दिया कि खार्ग द्वीप पर मौजूद तेल से जुड़े किसी भी बुनियादी ढांचे को इन हमलों में कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। इस बयान में ईरान की उस पिछली चेतावनी को भी दोहराया गया है, जिसमें उसने देश के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर किसी भी तरह के हमले के गंभीर परिणामों के बारे में आगाह किया था।

आईआरजीसी ने कहा कि अगर ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला किया जाता है, तो उस पूरे क्षेत्र में मौजूद तेल और गैस से जुड़े सभी बुनियादी ढांचे खाक में मिला दिये जाएंगे, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के हित जुड़े हुए हैं।

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