तकनीक एवं आर्थिक-रणनीतिक साझेदारी में भारत का बड़ा कदम, पैक्स सिलिका में हुआ शामिल, जानें कैसे और कहां होगा फायदा?
भारत-अमेरिका का 'पैक्स सिलिका' समझौता: तकनीक और भविष्य पर मुहर
भारत और अमेरिका ने 'पैक्स सिलिका' घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। अश्विनी वैष्णव और अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने इसे तकनीकी नेतृत्व और युवा पीढ़ी के सुनहरे भविष्य के लिए ऐतिहासिक निवेश बताया।
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका ने तकनीक एवं आर्थिक-रणनीतिक साझेदारी की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए शुक्रवार को पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किये। इस समझौते पर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और अमेरिका के आर्थिक मामलों के उप मंत्री जैकब हेलबर्ग की मौजदूगी में हस्ताक्षर किये गये।
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने हस्ताक्षर समारोह में पैक्स सिलिका में भारत के औपचारिक प्रवेश की घोषणा की। उन्होंने इसे एक निर्णायक कदम करार दिया जो 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को आकार देने में मदद करेगा। गोर ने हाल ही में संपन्न अंतरिम व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि यह समझौता केवल व्यापार प्रवाह और आयात शुल्क सूचियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो महान लोकतंत्रों की एक साथ मिलकर निर्माण करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह घोषणा भारत और अमेरिका के बीच गहरे होते रणनीतिक तालमेल को रेखांकित करती है, जो भारत को अगली पीढ़ी के आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण साबित होगा। तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में, पैक्स सिलिका में भारत की भागीदारी को साझा समृद्धि, तकनीकी नेतृत्व और लोकतांत्रिक सहयोग में एक दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखा जा रहा है।
अश्विनी वैष्णव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, विदेश मंत्री एस.जयशंकर और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल दृष्टिकोण के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने एआई इम्पैक्ट समिट और विकसित हो रही सिलिकॉन आपूर्ति शृखंला साझेदारी को संभव बनाने का श्रेय भी उनके नेतृत्व को दिया।
अश्विनी वैष्णव ने जोर देते हुए कि भारत 28 वर्ष की औसत आयु के साथ दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है। उन्होंने कहा, हम यहां केवल एक शिखर सम्मेलन आयोजित नहीं कर रहे हैं, हम भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। हम युवा पीढ़ी के लिए नींव रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2047 में भी भारत की औसत आयु 37 वर्ष होगी, जो तकनीक और नवाचार के दम पर दशकों तक निरंतर विकास और अवसरों को सुनिश्चित करेगी।

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