केंद्र सरकार ने दी 10,000 करोड़ रूपए के स्टार्टअप इंडिया फंड 2.0 को मंजूरी, उद्यम पूंजी की सुविधा बढ़ेगी
स्टार्टअप इंडिया फंड 2.0: ₹10,000 करोड़ की मंजूरी
प्रधानमंत्री मोदी ने स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए ₹10,000 करोड़ के स्टार्टअप इंडिया फंड 2.0 को मंजूरी दी। यह कोष डीप-टेक और नवाचार-आधारित विनिर्माण क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता देगा।
नई दिल्ली। सरकार ने देश में बढ़ते स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए 10 हजार करोड़ रु. के स्टार्टअप इंडिया फंड 2.0 को मंजूरी प्रदान की है। इसका उद्देश्य स्टार्टअप इकाइयों के लिए उद्यम पूंजी कोष को अधिक सुलभ बनाना है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को स्टार्टअप इंडिया फंड 2.0 की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दी। सूचना प्रसारण मंत्री अश्चिनी वैष्णव ने शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह योजना भारत के स्टार्टअप सफर के अगले चरण को तेज करने के लिए तैयार की गई है।
वर्ष 2016 में शुरू की गयी स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत शुरू किये गये इस कोष के बारे में सरकार ने कहा है, इस कोष के गठन का उद्देश्य दीर्घकालिक घरेलू पूंजी को आकर्षित करना, वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम को मजबूत बनाना और देशभर में नवाचार-आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना है। इसे देश में नवाचारों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए तैयार किया गया है। यह डीप टेक और तकनीक-आधारित नवोन्मेषी विनिर्माण उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में ऐसे नवाचारों को उद्यम पूंजी सहाता करने को प्राथमिकता देगा जिन्हें दीर्घकालिक और धैर्यपूर्ण पूंजी की आवश्यकता होती है।
देश में स्टार्टअप वातावरण का अभूतपूर्व रूप से विकास हुआ है। पिछले एक दशक में पंजीकृत एवं उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप इकाइयों की संख्या जो 500 से भी कम थी, बढ़ कर दो लाख से अधिक हो चुकी है। स्टार्टअप इंडिया फंड 2.0 का गठन स्टार्ट अप के लिए शुरू किये गये पहले फंड ऑफ फंड्स (एफएफएस 1.0) की मजबूत सफलता पर आधारित है। एफएफएस 1.0 के अंतर्गत 10,000 करोड़ रुपये की पूरी राशि से 145 वैकल्पिक निवेश कोषों(एआईएफ) की मदद की गयी। इन वैकल्पिक निवेश कोषों ने देशभर के 1,370 से अधिक स्टार्टअप्स में 25,500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। यह निवेश पाने वाली इकाइयों में कृषि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ऑटोमोबाइल, क्लीन टेक, उपभोक्ता वस्तुएं एवं सेवाएं, ई-कॉमर्स, शिक्षा, फिनटेक, खाद्य एवं पेय पदार्थ, स्वास्थ्य सेवा, विनिर्माण, स्पेस टेक और बायोटेक्नोलॉजी सहित अनेक क्षेत्रों में काम करने वाली स्टार्टअप इकाइयां शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि एफएफएस 1.0 ने पहली बार उद्यम शुरू करने वाले संस्थापकों को समर्थन देने, निजी पूंजी को आकर्षित करने और भारत के वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम की मजबूत नींव तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्टार्टअप इंडिया फंड 2.0 नवप्रवर्तनकारी विचारों के साथ शुरू की गयी इकाइयों को उनके काम के शुरुआती विकास चरण में उन्हें मजबूती प्रदान करने के लिए बनाया जा रहा है। ऐसी इकाइयों के लिए शुरुआती चरण में धन की कमी के कारण विफलता का जोखिम ज्यादा होता है।
इसमें बड़े महानगरों से दूर के इलाकों में भी निवेश को प्रोत्साहित कर देश के हर कोने में नवाचार को बढ़ावा देने, उद्यम पूंजी की बड़ी कमी का समाधान करने तथा आत्मनिर्भरता और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अधिक पूंजी का प्रवाह सुनिश्चित करना है। इससे घरेलू उद्यम पूंजी आधार मजबूत होने छोटे निवेश कोषों के लिए को काम का परिदृश्य मजबूत होने की उम्मीद है।

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