UPA सरकार ने 'गुड का गोबर' किया था: सीतारमण

कहा- मोदी सरकार यूपीए के 10 साल के कुप्रबंधन को ठीक करने में लगी है

UPA सरकार ने 'गुड का गोबर' किया था: सीतारमण

वित्त मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने यूपीए सरकार के काल में हुई गलतियों को ठीक किया है। आर्थिक सुधार किए गए। रुकी परियोजनाएं शुुरु हुईं।

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को राज्यसभा में कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार की गलतियों को नरेंद्री मोदी सरकार ने सुधारा है और भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व की पांच मजबूत अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी में खड़ा करने में सफलता प्राप्त की है।

सीतारमण ने सदन में भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति - श्वेत पत्र पर हुई चर्चा का उत्तर देते हुए कि साल 2014 में मोदी सरकार को एक नाजुक अर्थव्यवस्था मिली थी जिसके कभी भी बिखरने का भय था जबकि यूपीए सरकार वर्ष 2004 में विरासत में एक मजबूत अर्थव्यवस्था मिली थी। यह श्वेत पत्र यूपीए के 10 वर्ष के गलत निर्णयों और उनको सुधारने के लिए मोदी सरकार के निर्णयों के प्रभाव के अंतर को दर्शाने के लिए लाया गया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने यूपीए सरकार के काल में हुई गलतियों को ठीक किया है। आर्थिक सुधार किये गये। रुकी परियोजनायें शुुरु हुईं और उन्हें निश्चित समय के भीतर पूरा किया गया। महंगाई की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम नरम थे। इसके कारण वैश्विक स्तर पर महंगाई की दर चार प्रतिशत से भी कम थी लेकिन यूपीए सरकार ने गुड का गोबर करते हुए घरेलू स्तर पर महंगाई की दर आठ प्रतिशत तक पहुंचा दी। तत्कालीन सरकार के निर्णयों के कारण आपूर्ति व्यवस्था बाधित हो गयी और खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ गये। आम जनता त्रस्त हो गई।

यूपीए सरकार के कार्यों का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि उसने राजनीतिक फायदा के अनावश्यक खर्च किये थे। उन्होंने जयपुर में कांग्रेस के एक अधिवेशन का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसमें स्वीकार किया कि उनकी सरकार महंगाई को काबू नहीं कर पायी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने महंगाई को नियंत्रित करने के साथ साथ इसके प्रभाव से गरीबों को बचाया है। विश्व व्यापार संगठन के  बाली समझौते का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की नीति सशक्तीकरण की है और गरीब कल्याण उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। मोदी सरकार ने बजट चक्र में बदलाव किया जिसके कारण राज्यों को अपनी योजना बनाने के लिए ज्यादा समय मिलता है और वे तेजी से निर्णय ले पाते हैं।

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सीतारमण ने कहा कि सरकार ने छोटे उद्योगों को मदद दी है और दिसंबर 2023 तक ऐसी इकाइयों की संख्या  3़ 17 करोड हो गयी थी। इनमें 1़ 17 करोड महिला कारोबारी है। निर्यात में छोटे उद्योगों की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत हो गयी। ये उद्योग कोविड काल के प्रभाव से बाहर आ गये हैं। सरकार को खुदरा और थोक कारोबारियों को छोटे उद्योग श्रेणी में शामिल किया है।

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बेरोजगारी बढ़ने के विपक्ष के आरोपों के जवाब में सीतारमण ने कहा कि वर्ष 2022-23 में बेरोजगारी की दर 3़ 2 प्रतिशत रही। सरकार ने रोजगार सृजन के लिए काम किया है और रोजगार मेले लगायें गये हैं। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में लगतार पंजीकरण बढ रहा है।  

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केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय और अन्य एजेंसियों के दरुपयोग करने के आरोप पर वित्त मंत्री ने कहा कि यूपीए सरकार में भारतीय स्टेट बैंक के एक अध्यक्ष को केवल इसलिए त्यागपत्र देना पडा था क्योंकि उन्होंने एक सिफारिशी व्यक्ति को ऋण देने से इंकार कर दिया था। 

उन्होंने कहा,'' वर्ष 2015 में श्वेत पत्र इसलिए नहीं लाया गया क्योंकि उस समय देश में आर्थिक संस्थानों की जो हालत थी उसको सामने लाकर हम देश के लोगों का आत्मबल नहीं तोड़ना चाहते थे। मोदी सरकार दस वर्षों से अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में लगी रही है और इसके परिणाम स्वरुप अर्थव्यवस्था पटरी पर आ रही है। हम आज उस स्तर पर पहुंच गये हैं कि जब  भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में तीसरे स्थान पहुंचने के करीब है।  सरकार ने इस उपलब्धि से यह सिद्ध कर दिया है कि शासन पारदर्शी तथा भ्रष्टाचारमुक्त होना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि यूपीए के समय भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति कंटीली झाड़ी में फंसे कपडे की तरह थी इसीलिए इसे बड़े तरीके से झाड़ी से निकाला गया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में काले धन पर उच्च स्तरीय समिति बनाने का फैसला किया गया। वित्त मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार यूपीए सरकार के 10 साल के कुप्रबंधन को ठीक करने और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के प्रयास में लगी है। 

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