'दलाल' देश बना शांतिदूत? कांग्रेस नेता जयराम रमेश का केंद्र पर हमला ; शांति वार्ता में पाकिस्तान की मेजबानी, भारतीय कूटनीति में बदलाव ज़रूरी
कूटनीतिक विफलता: पाकिस्तान को अलग-थलग करने में नाकाम सरकार- कांग्रेस
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जिस पाकिस्तान को विदेश मंत्री ने 'दलाल' कहा, वही आज अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की मेजबानी कर रहा है। रमेश के अनुसार, पाकिस्तान का बढ़ता वैश्विक प्रभाव और डोनाल्ड ट्रंप से उसकी करीबी भारत की रणनीतिक हार और कूटनीतिक विफलता का संकेत है।
नई दिल्ली। कांग्रेस ने सरकार पर पाकिस्तान को उसकी नीतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा है कि जिस देश को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ‘दलाल’ बता रहे थे, उसी को दूसरी बार अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की मेजबानी का मौका मिल रहा है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोमवार को एक बयान में इसे केंद्र के नेतृत्व वाली सरकार की विदेश नीति के लिए झटका बताया और कहा कि अब कूटनीतिक तथा रणनीतिक स्तर पर बदलाव की सख्त जरूरत है।
उन्होंने विदेश मंत्री पर भी निशाना साधा और कहा, “बहुत जानकार और हमेशा सलीके से पेश आने वाले विदेश मंत्री ने जिस देश को ‘दलाल’ बताया था, वही आज अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दूसरे दौर की मेजबानी कर रहा है। बारह अप्रैल को पहले दौर की वार्ता पूरी होने के बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब और कतर से छह अरब डॉलर का कर्ज लिया, ताकि संयुक्त अरब अमीरात के 3.5 अरब डॉलर के कर्ज को चुका सके और 1.43 अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड की एक किश्त का भुगतान कर सके।”
जयराम रमेश ने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है और वह मित्र देशों की सहायता पर निर्भर है, इसके बावजूद वह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन जैसे सभी आतंकवादियों को शरण दी, अफगानिस्तान में ड्रग पुनर्वास केंद्रों पर बमबारी की और हाल में पहलगाम आतंकवादी हमले की साजिश रची। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार की क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति पाकिस्तान को अलग-थलग करने में विफल रही है, जबकि नवंबर 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय भारत ने पाकिस्तान पर प्रभावी दबाव बनाया था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि यह भारत के लिए चिंता का विषय है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर अब डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जा रहे हैं। उनके अनुसार, पाकिस्तान ने ट्रंप के परिवार और उनके करीबी नेटवर्क के साथ संबंध बनाने में भारत की तुलना में अधिक सफलता पायी है। उन्होंने कहा, “यह भी केंद्र सरकार की विदेश नीति के लिए बड़ा झटका है। भारत को अपनी कूटनीतिक रणनीति और तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव की जरूरत है, जिसके लिए मौजूदा नेतृत्व सक्षम नहीं दिखता।”

Comment List