बिहार में पुल ढहने के मामले की जांच के लिए दायर याचिका पटना उच्च न्यायालय स्थानांतरित, न्यायाधीश खन्ना ने कहा - हमने जवाबी हलफनामे को देखा
बिना किसी तीसरे पक्ष के निरीक्षण के कई पुल ढह गए
उच्चतम न्यायालय ने बिहार में कई पुलों के ढहने की घटनाओं की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन की मांग वाली जनहित याचिका को बुधवार को पटना उच्च न्यायालय स्थानांतरित कर दिया
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने बिहार में कई पुलों के ढहने की घटनाओं की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन की मांग वाली जनहित याचिका को बुधवार को पटना उच्च न्यायालय स्थानांतरित कर दिया। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने यह आदेश पारित किया। याचिका में यह गुहार लगाई है कि एक साथ कई पुलों के ढहने की घटनाओं की संपूर्ण संरचनात्मक ऑडिट और कमजोर पुलों का आकलन करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन करने का निर्देश दिया जाए। पीठ ने बिहार सरकार के जवाबी हलफनामे में दिए गए विवरणों की समीक्षा करने के बाद मामले को पटना उच्च न्यायालय स्थानांतरित करने का फैसला किया। पीठ की ओर से मुख्य न्यायाधीश खन्ना ने कहा कि "हमने जवाबी हलफनामे को देखा है और हम इसे पटना उच्च न्यायालय स्थानांतरित कर रहे हैं। हलफनामे में निरीक्षण और किए जा रहे उपायों का विवरण है।"
याचिकाकर्ता के वकील ने कार्यवाही के दौरान इस बात पर जोर दिया कि बिना किसी तीसरे पक्ष के निरीक्षण के कई पुल ढह गए थे। पीठ की ओर से न्यायमूर्ति कुमार ने स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि "तीन निर्माणाधीन पुल ढह गए! संबंधित अधिकारियों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया और फिर बहाल कर दिया गया। सभी लोग इसमें शामिल लग रहे हैं।"
बिहार सरकार का पक्ष रख रहे अधिवक्ता ने जवाब में कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की गई है। इसके अलावा, उन्होंने पीठ को सूचित किया कि 10,000 से अधिक पुलों का निरीक्षण पहले ही किया जा चुका है। इसके बाद शीर्ष अदालत ने एक आदेश पारित किया, जिसमें कहा गया कि "विवाद की प्रकृति और जवाबी हलफनामे को देखते हुए हमारा मानना है कि इस रिट याचिका को पटना उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया जाना चाहिए, जो नियमित अंतराल पर शीघ्र और उचित सुनवाई कर सकता है। रजिस्ट्री (शीर्ष अदालत की) को चार सप्ताह के भीतर फाइलें स्थानांतरित करने का निर्देश दिया जाता है। साथ ही संबंधित पक्षों को 14 मई, 2025 को उच्च न्यायालय के समक्ष उपस्थित होना है।"
इससे पहले, जुलाई 2024 में उच्चतम न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा पीठ ने मामले में नोटिस जारी किया था। बिहार में हाल ही में कम से कम 9 पुल ढहने की रिपोर्ट के बाद जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें निर्माणाधीन संरचनाएं भी शामिल हैं। याचिका में बाढ़-ग्रस्त राज्य में पुल सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की अखंडता के बारे में गंभीर चिंताएं जताई गई हैं। जनहित याचिका में न केवल ऑडिट की मांग की गई है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलों के निरंतर मूल्यांकन और निगरानी के लिए एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति के गठन की भी मांग की गई है। इसमें नदी के आस-पास के क्षेत्रों, विशेष रूप से अररिया, सीवान, मधुबनी और किशनगंज जिलों में कई पुल ढहने की घटनाओं का उल्लेख किया गया है। याचिका में कहा गया है, "यह गंभीर चिंता का विषय है कि भारत के सबसे अधिक बाढ़-ग्रस्त राज्य बिहार, जिसका 73.06 फीसदी भौगोलिक क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित है, में लगातार पुल ढह रहे हैं। इससे सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा है और इसके लिए तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है।" याचिकाकर्ता ने राष्ट्रीय राजमार्गों और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के संरक्षण के लिए 04 मार्च, 2024 की अपनी नीति में उल्लिखित सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा विकसित पद्धतियों के आधार पर पुलों की वास्तविक समय पर निगरानी करने का भी आह्वान किया।
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