प्रधानमंत्री कार्यालय से हो गंदे पानी की घटना की जांच के आदेश : लोगों की मौत भाजपा की गंभीर लापरवाही का परिणाम, खेड़ा ने कहा- नागरिकों की जिंदगी खतरे में डाली
जिंदगी की पूरी तरह से अनदेखी को सामने लाती है
इस लापरवाही के कारण जब मासूम बच्चे और शिशु मर रहे है, तो राज्य के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ मंत्री अपनी चुप्पी साधे हुए है।
नई दिल्ली। कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के इंदौर में गंदा पानी पीने लोगों की मौत को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की गंभीर लापरवाही का परिणाम बताते हुए कहा है कि इसकी जांच खुद प्रधानमंत्री कार्यालय से हो और अलग से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश से इसकी स्वतंत्रता तथा निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में सवाल किया कि भाजपा सरकार की लापरवाही के चलते शहर के पीने के पानी में सीवेज के पानी को घुसने दिया गया और नागरिकों की बार-बार चेतावनियों को नजर अंदाज करके हजारों लोगों की जिंदगी खतरे में डाली गई है। पार्टी का कहना है कि यह घटना भाजपा सरकार की लापरवाही से हुई है, जबकि इस घटना को रोका जा सकता था। इस लापरवाही के कारण जब मासूम बच्चे और शिशु मर रहे है, तो राज्य के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ मंत्री अपनी चुप्पी साधे हुए है।
उन्होंने कहा कि यह दुखद घटना भाजपा सरकार के घमंड, नाकाबिलियत और इंसानी जिंदगी की पूरी तरह से अनदेखी को सामने लाती है। मध्य प्रदेश के लोग न्याय, जवाबदेही और तुरंत सुधार के हकदार हैं। अब समय आ गया है कि भाजपा अपनी नाकामी और अपनी बड़ी लापरवाही की वजह से गई जानें के लिए जवाब दे। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा सरकार का क्रूर, निर्दयी और पूरी तरह से उदासीन चेहरा इस घटना से उजागर हो गया है। इंदौर में, मध्य प्रदेश की सरकार की बड़ी लापरवाही, नाकाबिलियत और साफ बेपरवाही की वजह से 6 महीने के एक बच्चे समेत 18 मासूम जानें चली गईं और ज्यादा लोग इससे प्रभावित हुए हैं। कई अभी भी आईसीयू में अपनी जान के लिए लड़ रहे हैं। यह वही इंदौर शहर है जिसने केंद्र सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण में लगातार आठवीं बार Þसबसे साफ शहरÞ का खिताब जीता है।
खेड़ा ने कहा कि लापरवाही की तुरंत प्रधानमंत्री कार्यालय से जांच के आदेश दिये जाएं साथ ही एशियन विकास बैंक और सुप्रीम कोर्ट स्तर के न्यायाधीश की देखरेख में एक स्वतंत्र जांच हो ताकि भाजपा सरकार को जवाबदेह ठहराया जा सके। सिफऱ् ऐसे दखल से ही यह पक्का हो सकता है कि इस बड़ी नाकामी के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए और बेगुनाह नागरिकों का खून बेकार न जाए। एशियन विकास बैंक में 2003 में भोपाल और जबलपुर के लिए 20 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया गया था, आखिर वह कर्ज कहां गया।

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