लोकसभा में 131वें संविधान संशोधन विधेयक का कड़ा विरोध : विपक्ष की वापस लेने की मांग, कहा- यह संविधान के खिलाफ; विरोध में पड़े 185 मत
विधेयक पेश करने के पक्ष में 251 मत पड़े
लोकसभा में 131वें संविधान संशोधन विधेयक 2026 पर तीखी टकराहट दिखी। विपक्ष ने इसे संविधान विरोधी बताते हुए वापस लेने की मांग की, जबकि सरकार ने पेश कर दिया। मत विभाजन में 251 बनाम 185 से विधेयक आगे बढ़ा। जनगणना, परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर सदन में तीखी बहस हुई, 12 घंटे चर्चा तय।
नई दिल्ली। लोकसभा में गुरुवार को विपक्षी सदस्यों ने 131वें संविधान संशोधन विधेयक 2026 का कड़ा विरोध करते हुए इसे संविधान के खिलाफ है और सरकार से विधेयक वापस लेने की मांग की। विपक्षी सदस्यों ने विधेयक पेश नहीं करने का सरकार से आग्रह किया, लेकिन जब सदन ने इसे ध्वनि मत से पुर स्थापित किया, तो विपक्ष ने इसको लेकर मतविभाजन की मांग की। सदन में मत विभाजन के दौरान विधेयक पेश करने के पक्ष में 251 मत पड़े, जबकि विरोध में 185 मत पड़े। मत विभाजन में विधेयक के पक्ष में बहुमत होने के बाद विधेयक को सदन में चर्चा के लिए पेश कर दिया गया। विधेयक पर फिलहाल 12 घंटे चर्चा का समय निर्धारित किया गया है। इससे पहले विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान का 131वें संशोधन विधेयक 2026 पेश करने तथा परिसीमन विधेयक 2026 को पुर स्थापित किए जाने के लिए सदन में पेश किया।
कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि सरकार इन विधेयकों के जरिये लोकतंत्र को हाईजैक करना चाहती है। सरकार संविधान विरोधी विधेयक लेकर के आयी है और सरकार को इस विधेयक को वापस लेना चाहिए। इस पर गृह मंत्री अमित ने कहा कि जब तक विधेयक पुरस्थापित नहीं होता है, इसके तकनीकी विषय और नियम पूरे नहीं होते हैं तब तक विधेयक को लेकर बात नहीं की जा सकती। समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव ने विधेयक का विरोध किया और कहा कि जो तीनों विधेयक सरकार सदन में लाई है] वे तीनों विधेयक संविधान विरोधी है और सरकार नियमों को तोड़ना मरोड़ना चाहती है इसलिए उनका पार्टी इसका विरोध करती है और सरकार को इन तीनों विधायकों को वापस लेना चाहिए।
सपा के अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी महिला संशोधन विधेयक के पक्ष में है, लेकिन सरकार जनगणना नहीं करना चाहती है, क्योंकि सरकार जानती है कि विपक्ष जाति गणना की बात करेगा। गृहमंत्री ने इसका जवाब देते हुए कहा कि सदन में कुछ ऐसे बयान दिए गए, जो जनता में संदेह पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि जनगणना को लेकर सवाल उठाना गलत है क्योंकि जनगणना का काम शुरू हो चुका है। उन्होंने बताया कि सरकार जाति की जनगणना करवा रही है। अभी घरों की गिनती हो रही है और घरों की कोई जाति नहीं होती इसलिए विपक्ष को जनगणना को लेकर सही जानकारी रखना आवश्यक है। उनका कहना था कि जनगणना में जाति का कॉलम रखा गया है और इस बार जनगणना में जाति जनगणना भी हो रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान में धर्म के आधार आरक्षण की बात नहीं है और सपा सदस्य गैर संवैधानिक बात कर रहे हैं।
तृणमूल कांग्रेस की कोकिला घोष ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पहले ही महिलाओं को अतिरिक्त सीटें दे रही है। सरकार जो विधेयक लेकर आई है वह संविधान विरोधी है। आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि महिला आरक्षण के आड़ में परिसीमन विधेयक लाया गया है। महिला आरक्षण विधेयक को सदन पहले ही पारित कर चुका है और वह संविधान का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार को जानकारी नहीं है कि जनगणना और परिसीमन में समय लगेगा और यदि सरकार इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए ऐसा कर रही है तो वह जानबूझकर यह विधेयक लेकर आई है। उनका कहना था कि जाति की जनगणना कराना संवैधानिक अधिकार है। द्रमुक के टीआर बालू ने कहा कि सरकार ने एक ही विधेयक में दोनों को जोड़ दिया है इसलिए यह समझ नहीं आ रहा कि सरकार ऐसा क्यों करना चाहती है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के पक्ष में है और बिना विलंब के इसे लागू करना चाहिए।
एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि कि यह विधेयक दक्षिणी के राज्यों के लिए उनकी जनसंख्या के हिसाब से ठीक नहीं है। सरकार इस विधेयक को उत्तर प्रदेश को आधार बनाकर लाई है और ऐसा कर उसने संविधान का उल्लंघन किया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के के राधाकृष्णन ने संविधान में 131वें संशोधन विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि सरकार जो विधायक लेकर के आई है। वह मतदाताओं में आशंका पैदा करती है और सरकार को इस विधेयक को वापस लेना चाहिए। उसे विधेयक को लेकर जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं थी। इस विधेयक के पारित होने से से केंद्र मजबूत होगा और राज्य कमजोर हो जाएंगे इसलिए इसे वापस लिया जाना चाहिए।

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