संयुक्त राष्ट्र ने बंगाल के चावल की 3 किस्मों को दी मान्यता : ममता ने कहा- राज्य के लिए यह गर्व का पल
हमारी सामाजिक पहल के लिए हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रमाणपत्र
अंतरराष्ट्रीय संगन के खाद्य और कृषि संगठन ने हमारे इनोवेटिव माटी सृष्टि प्रोग्राम में हमारी सामाजिक पहल के लिए हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रमाणपत्र है।
कोलकाता। संयुक्त राष्ट्र ने पश्चिम बंगाल की तीन पारंपरिक चावल की किस्मों गोबिंदोभोग, तुलाईपंजी और कनकचूर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर इस जानकारी का साझा करते हुए इसे इसे राज्य के लिए गर्व का पल बताया। संयुक्त राष्ट्र ने राज्य सरकार के फ्लैगशिप प्रोजेक्ट माटी सृष्टि को भी मान्यता प्रदान की है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि संयुक्त राष्ट्र ने हमारी पहल को एक बार फिर मान्यता दी है। अंतरराष्ट्रीय संगन के खाद्य और कृषि संगठन ने हमारे इनोवेटिव माटी सृष्टि प्रोग्राम में हमारी सामाजिक पहल के लिए हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रमाणपत्र है।
चावल की किस्मों को हेरिटेज की श्रेणी
मुख्यमंत्री के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक खाद्य संस्कृति की पहचान के हिस्से के तौर पर तीन खुशबूदार चावल की किस्मों को हेरिटेज की श्रेणी दी है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान ग्रामीण बंगाल के लोगों, खासकर राज्य के किसानों को समर्पित है। ममता बनर्जी ने यह भी घोषणा की कि संगठन ने माटी सृष्टि को इंटरनेशनल पहचान दी है। इस पहल का मकसद पश्चिमी जिलों में बंजर और एक ही फसल वाली ज़मीन को खेती के लायक बनाना है। गौरतलब है कि गोबिंदोभोग चावल, अपनी खास खुशबू और स्वाद के लिए बहुत मशहूर है, मुख्य रूप से पूर्व बर्धमान, हुगली, नादिया, बांकुरा और बीरभूम जैसे जिलों में उगाया जाता है। तुलईपंजी उत्तर बंगाल का एक मशहूर खुशबूदार चावल है, जो मुख्य रूप से उत्तर दिनाजपुर और आस-पास के इलाकों में उगाया जाता है, जबकि कनकचूर की खेती मुख्य रूप से दक्षिण 24 परगना में की जाती है।

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