ईरानी जहाज पर हमले के बाद पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने उठाए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल, कहा-भारत देश की शक्ति उसकी स्वतंत्र आवाज में है, न कि किसी की जी-हुजूरी में
हिंद महासागर में हमले पर अशोक गहलोत का केंद्र पर प्रहार
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने हिंद महासागर में ईरानी जहाज पर अमेरिकी हमले के बाद मोदी सरकार की रणनीतिक चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे भारत की संप्रभुता और 'अतिथि देवो भव' के संस्कारों के खिलाफ बताया। गहलोत ने नेहरू और इंदिरा गांधी की निडर कूटनीति का हवाला देते हुए सरकार से स्वायत्तता बनाए रखने का आग्रह किया।
जयपुर: हिन्द महासागर में ईरानी जहाज पर अमेरिकी हमले के बाद पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। गहलोत ने ट्वीट कर कहा कि भारत देश की शक्ति उसकी स्वतंत्र आवाज में है, न कि किसी की जी-हुजूरी में। नेहरू के गुट निरपेक्ष आंदोलन से लेकर इंदिरा की निडर कूटनीति तक, भारत कभी किसी महाशक्ति के दबाव में नहीं झुका।
हम सभी को 2013 का देवयानी खोबरागड़े मामला भी याद करना चाहिए जब डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने अमेरिकी राजनयिकों की सुविधाएं छीनकर जैसे को तैसा जवाब दिया था। भारत ने कभी भी किसी दूसरे देश के दबाव में आकर अपनी संप्रभुता एवं नीतियों से समझौता नहीं किया। परन्तु हमारे ही समुद्री पड़ोस में मिलान 2026 के मेहमान ईरानी जहाज का शिकार होना और हमारी रणनीतिक चुप्पी, भारत की साख पर सवाल उठाती है।
अमेरिका की इस मनमानी पर चुप रहना अतिथि देवो भव के हमारे संस्कारों और सैन्य गौरव के खिलाफ है। हिंद महासागर का असली रक्षक कहलाने वाले भारत की चुप्पी क्या कूटनीतिक दबाव का संकेत है। एक उभरती महाशक्ति को अपने क्षेत्र में होने वाली ऐसी हिंसक घटनाओं पर मूकदर्शक नहीं बने रहना चाहिए। अगर हम हिंद महासागर के असली रक्षक हैं, तो हमें अपनी स्वायत्तता और मेहमान की सुरक्षा को सर्वोपरि रखना होगा।

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