अखिलेश यादव ने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को अर्पित की श्रद्धांजलि : नोएडा की घटना के लिए राज्य सरकार को ठहराया जिम्मेदार, सत्ता परिर्वतन की मांग
अखिलेश का प्रहार: संविधान और नोएडा कांड पर सरकार को घेरा
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बाबा साहब को नमन करते हुए नोएडा घटना पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने इसे इंटेलिजेंस फेलियर बताते हुए 'संवैधानिक मूल्यों' की रक्षा का संकल्प लिया। अखिलेश ने सत्ता पक्ष पर सामाजिक न्याय की अनदेखी का आरोप लगाया और 2027 में जनता द्वारा बदलाव का दावा किया।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौक़े पर उन्होंने नोएडा में हुई घटना को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इसे सरकार की नाकामी बताते हुए कहा कि इंटेलिजेंस पूरी तरह फेल रही और प्रशासन को पहले से जानकारी होने के बावजूद घटना को होने दिया गया। उन्होंने कहा कि अगर यह कोई बड़ी साजिश है तो इसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर सरकार पर आती है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 में सत्तारूढ़ पार्टी को हटाया जाएगा और उनकी पार्टी बाबा साहब के संविधान पर आधारित समाज की स्थापना करेगी।
अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर व्यक्तिगत हमला करते हुए कहा कि उनसे बड़ा झूठ बोलने वाला कोई “संत” नहीं है। उन्होंने उन्हें “नकली संत” बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार का संविधान से कोई सरोकार नहीं है। सपा प्रमुख ने कहा कि राज्य सरकार के नेता हार के डर से भूमिगत हो गए हैं, लेकिन जनता मिलकर उन्हें हराने और सत्ता से हटाने का काम करेगी। उन्होंने भीमराव अंबेडकर के संविधान को “लोहे की तलवार” बताते हुए कहा कि यह देश के लोगों को न्याय और सम्मान दिलाने का माध्यम है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के दौरान बाबा साहब की प्रतिमाओं को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया गया है और चुनाव से पहले बजट के जरिए जनता को गुमराह करने की कोशिश की जाती है। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेश में दलितों, पिछड़ों और पीडीए वर्ग के खिलाफ भेदभाव जारी है, हालांकि जनता अब इन साजिशों को समझ चुकी है। अखिलेश यादव ने कहा कि सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए उनका संघर्ष लगातार जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं द्वारा 400 से अधिक सीटें जीतने और संविधान बदलने के दावे किए गए थे, लेकिन उत्तर प्रदेश की जनता ने मतदान के जरिए संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की है।

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