फ्रांस-ब्रिटेन होर्मुज में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करेंगे : राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन
होर्मुज संकट: फ्रांस और ब्रिटेन की शांति पहल
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और पीएम कीर स्टार्मर होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन के लिए अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। यह मिशन पूरी तरह रक्षात्मक होगा और अमेरिकी नाकेबंदी से अलग स्वतंत्र रूप से कार्य करेगा। इसका उद्देश्य वैश्विक व्यापार मार्ग को बहाल करना और तनावपूर्ण क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय सहयोग सुनिश्चित करना है।
पेरिस। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने सोमवार को यह घोषणा की कि फ्रांस और ब्रिटेन आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। फ्रांसिसी राष्ट्रपति ने बताया कि इस सम्मेलन में उन देशों को एक साथ लाया जाएगा जो नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने के उद्देश्य से एक शांतिपूर्ण, बहुराष्ट्रीय अभियान में योगदान देने के इच्छुक हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, "यह पूरी तरह से रक्षात्मक मिशन होगा, जो युद्धरत पक्षों से अलग होगा और परिस्थितियों के अनुकूल होते ही इसे तैनात किया जाएगा।"
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ब्रिटेन ने 40 से अधिक देशों को इस मिशन के लिए आमंत्रित किया है जो नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने के हमारे लक्ष्य को साझा करते हैं। स्टार्मर ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने को 'बेहद हानिकारक' बताते हुए कहा कि ब्रिटेन और फ्रांस इस सप्ताह एक शिखर सम्मेलन की सह-मेजबानी करेंगे। इसका उद्देश्य संघर्ष समाप्त होने पर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की सुरक्षा के लिए एक समन्वित, स्वतंत्र और बहुराष्ट्रीय योजना पर काम करना है।
मैक्रॉन का यह बयान श्री स्टार्मर के उस रुख के बाद आया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया था कि ब्रिटेन ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी सैन्य नाकेबंदी में शामिल नहीं होगा। गौरतलब है कि कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उद्घोषणा के अनुरूप सोमवार सुबह 10 बजे (भारतीय समयानुसार रात 8:30 बजे) से ईरानी बंदरगाहों के सभी समुद्री यातायात को रोकने की घोषणा की है। ब्रिटेन ने स्पष्ट किया है कि उसके 'माइनस्वीपर्स' (समुद्री बारूदी सुरंग हटाने वाले जहाज) और एंटी-ड्रोन इकाइयां क्षेत्र में अपना संचालन जारी रखेंगी, लेकिन ब्रिटिश नौसैनिक जहाजों और सैनिकों का उपयोग अमेरिकी नाकेबंदी लागू करने के लिए नहीं किया जाएगा।
इस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान द्वारा परमाणु हथियारों को त्यागने से इनकार करना 'इस्लामाबाद वार्ता' की विफलता का मुख्य कारण रहा। वहीं, ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि तेहरान ने 'भविष्योन्मुखी पहल' का प्रस्ताव रखा था, लेकिन वह अभी तक अमेरिकी विश्वास हासिल नहीं कर सका है।

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