बाड़मेर में तेल कम्पनी के ब्लास्ट्स के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन, अस्पताल भवन और स्कूल की इमारत जर्जर
बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर
बाड़मेर जिले के तेल उत्खनन क्षेत्र में किए जा रहे भूमिगत ब्लास्ट्स से क्षेत्र में एक बार फिर दहशत। बड़ी संख्या में किसान सड़क पर उतर आए और जोरदार प्रदर्शन। किसानों ने बताया कि वे पिछले कुछ वर्षों से इन धमाकों से परेशान। बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर। अस्पताल भवन और स्कूल की इमारत जर्जर।
बाड़मेर। बाड़मेर जिले के तेल उत्खनन क्षेत्र में किए जा रहे भूमिगत ब्लास्ट्स से क्षेत्र में एक बार फिर दहशत फैल गई है। गुरुवार को बड़ी संख्या में किसान सड़क पर उतर आए और जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने बताया कि वे पिछले कुछ वर्षों से इन धमाकों से परेशान हैं। प्रदर्शन करने वालों में दस-बारह गांवों के किसान शामिल हैं। थरथरा उठा इलाका, कुओं का पानी काला पड़ा : हाल ही में तेल उत्खनन का काम कर रही केयर्न वेदांता कंपनी द्वारा किए गए भूमिगत ब्लास्ट के बाद इलाके में तेज कंपन महसूस किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इस कंपन से कई घरों, स्कूलों में दरारें आ गई हैं। अस्पताल भवन और स्कूल की इमारत जर्जर हो चुकी हैं। स्कूल तो इस कदर जर्जर हुए हैं कि पिछले दो दिनों से बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं जबकि बोर्ड परीक्षाएं जारी हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि छितर का पार, जोगासर और काउखेड़ा जैसे गांवों के ट्यूबवेल, जिनसे पूरे जिले में जलदाय विभाग पानी सप्लाई करता था, ब्लास्ट के कारण खराब हो गए हैं। कृषि कुओं में काले रंग का रासायनिक पानी आने लगा है जिससे जमीन बंजर होती जा रही है।
फसलों पर बुरा असर, आजीविका प्रभावित
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी फसलें प्रभावित हो रही हैं और आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि पहले भी कई बार जांच समितियां गठित की गईं लेकिन उनकी रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं हुई। नुकसान के बावजूद किसानों को मुआवजा नहीं मिला। हाल में हुए ब्लास्ट के बाद भी कंपनी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं कर रही। कंपनी यह कहकर पल्ला झाड़ रही है कि मलेशिया में आए भूकंप का असर यहां महसूस हो रहा है। आक्रोशित किसानों ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन कर अतिरिक्त जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने प्रशासन और कंपनी को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो तेल उत्पादन बंद करवाकर आंदोलन तेज किया जाएगा।

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