आज 137वें साल में प्रवेश करेगा अल्बर्ट हॉल
अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में पुरा महत्व की 2639 वस्तुएं प्रदर्शित
इसमें चौथी से लेकर 14वीं शताब्दी तक की पुरामहत्व की वस्तुएं मौजूद हैं। स्थापना दिवस पर मंगलवार को संग्रहालय आने वाले पर्यटकों को निशुल्क प्रवेश दिया जाएगा।
जयपुर। अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में पुरा महत्व की 2639 वस्तुएं प्रदर्शित हैं, जिनमें सबसे अहम कलेक्शन मिस्त्र की ममी मानी जाती है, जो 2400 साल पुरानी है। इसके अतिरिक्त हैंडी क्राफ्ट, मेटल की मूर्तियां, कारर्पेट, सिक्के, टैक्सटाइल्स, तलवार, भाले, विभिन्न बंदूकें, विभिन्न हथियार, ममी की गैलेरी सहित अन्य दुर्लभ और महत्वपूर्ण वस्तुएं पर्यटकों के अवलोकनार्थ प्रदर्शित हैं। अल्बर्ट हॉल संग्रहालय का निर्माण 21 फरवरी, 1887 में हुआ था। इसमें चौथी से लेकर 14वीं शताब्दी तक की पुरामहत्व की वस्तुएं मौजूद हैं। स्थापना दिवस पर मंगलवार को संग्रहालय आने वाले पर्यटकों को निशुल्क प्रवेश दिया जाएगा।
संग्रहालय के अधीक्षक डॉ.राकेश छोलक ने बताया कि महारानी विक्टोरिया के पुत्र प्रिंस आॅफ वेल्स अल्बर्ट एडवर्ड ने जयपुर आगमन के दौरान रामनिवास बाग में 1876 में अल्बर्ट हॉल की बुनियाद रखी थी, जो करीब 11 साल में बनकर तैयार हुआ। इसे 5,11,036 रुपए की लागत से तैयार किया गया था। इस बात की जानकारी संग्रहालय में लगे पट्ट पर भी देखने को मिल सकती है। वहीं 21 फरवरी, 1887 को सर एडवर्ड ब्रौडफोर्ड ने इसे जनता के लिए समर्पित किया। संग्रहालय में भारतीय ईरानी स्थापत्य और पाषाण अलंकरण मुगल राजपूत स्थापत्य के लिए खास है। इसमें यूरोप, मिश्र, चीन, ग्रीक सहित अन्य जगहों की सभ्यता की प्रमुख घटनाएं चित्रित की गई ताकि आने वाले पर्यटक अपनी संस्कृति के साथ-साथ अन्य देशों की संस्कृति और सभ्यता से रूबरू हो सकें। साल 2007-08 में संग्रहालय के डिस्प्ले में काफी बदलाव किए गए। ममी की एक गैलेरी बनाई गई थी। साथ ही पर्यटकों की सुविधार्थ इसे नाइट टूरिज्म के लिए खोला गया।

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