आमेर महल में विरासत संरक्षण की बड़ी पहल : भित्ति चित्रों को मिलेगा नया जीवन सिंहपोल, गणेशपोल और मानसिंह महल में हाईटेक तकनीक से होगा संरक्षण
2006-07 के बाद फिर शुरू हुआ बड़ा काम
यूनेस्को विश्व धरोहर आमेर महल में भित्ति चित्रों के संरक्षण का कार्य शुरू किया जा रहा। सिंहपोल, गणेशपोल और अन्य हिस्सों में प्राकृतिक रंगों से बने चित्रों को संरक्षित। IGNCA द्वारा आधुनिक तकनीक से थर्मल स्कैनिंग कर मरम्मत। ऐतिहासिक धरोहर बचाने और पर्यटन बढ़ाने के उद्देश्य से की जा रही।
जयपुर। यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल जयपुर का आमेर महल एक बार फिर अपने ऐतिहासिक वैभव को संवारने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। महल के विभिन्न हिस्सों में भित्ति चित्रों के संरक्षण का महत्वपूर्ण कार्य शुरू किया जा रहा है, जिससे इसकी कला और स्थापत्य को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके। इस संरक्षण अभियान के तहत सिंहपोल, गणेशपोल, भोजनशाला और मानसिंह महल में बने प्राकृतिक रंगों से तैयार भित्ति चित्रों को संरक्षित किया जाएगा। यह कार्य इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर द आर्ट (IGNCA) द्वारा किया जाएगा। महल के अधीक्षक डॉ. राकेश छोलक के अनुसार, यह पहल न केवल ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए जरूरी है, बल्कि पर्यटन को भी नई ऊंचाई देगी।
खास बात यह है कि संरक्षण कार्य में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। दीवारों की थर्मल स्कैनिंग हाईटेक मशीनों से की जाएगी, जिससे सीलन, दरार या अन्य क्षति का सटीक पता लगाया जा सके। इसके आधार पर विशेषज्ञों द्वारा वैज्ञानिक तरीके से मरम्मत और संरक्षण किया जाएगा। भोजनशाला की दीवारों पर बनी चित्रकारी विशेष आकर्षण का केंद्र है, जिसमें काशी, मथुरा और वृंदावन के घाटों को बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया है। ये चित्र उस समय की सांस्कृतिक झलक भी प्रस्तुत करते हैं।

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