किसी भाषा की जानकारी नहीं होने के आधार पर नार्को टेस्ट से नहीं किया जा सकता इनकार: हाईकोर्ट

हत्या मामले में दोबारा जांच के आदेश

किसी भाषा की जानकारी नहीं होने के आधार पर नार्को टेस्ट से नहीं किया जा सकता इनकार: हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने भाषा की अज्ञानता के आधार पर नार्को टेस्ट से इनकार करने को गलत बताया है। जस्टिस अनूप कुमार ने कहा कि जरूरत पड़ने पर दुभाषिया (इंटरप्रेटर) की मदद ली जा सकती है। अदालत ने निचली अदालत का आदेश रद्द करते हुए डिप्टी स्तर के अधिकारी से निष्पक्ष अग्रिम जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने हत्या से जुड़े मामले में कहा है कि यह बड़े आश्चर्य की बात है कि प्राधिकारी ने इस आधार पर नार्को टेस्ट से इनकार कर दिया कि संबंधित व्यक्ति को हिंदी धाराप्रवाह नहीं आती है। इसके साथ ही अदालत ने मामले में पुलिस की ओर से पेश एफआर को स्वीकार करने वाले निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामले की जांच डिप्टी स्तर के अधिकारी से कराई जाए और वह जरूरत पड़ने पर नार्को टेस्ट सहित जांच करते हुए रिपोर्ट निचली अदालत में पेश करे। जस्टिस अनूप कुमार ने यह आदेश फेलीराम की ओर से दायर आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि नार्को टेस्ट के लिए फॉरेंसिक साइकोलॉजिस्ट, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट, सामान्य चिकित्सक और मनोचिकित्सक के साथ जरूरत होने पर 

दुभाषिया को शामिल किया जा सकता है। केवल भाषा नहीं बोलने के चलते नार्को टेस्ट करने से मना नहीं किया जा सकता। याचिका में अधिवक्ता गौरव शर्मा ने बताया की याचिकाकर्ता ने अपने भाई की हत्या को लेकर साल 2015 में दौसा के रामगढ़ पचवाड़ा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसमें जांच अधिकारी ने लचर जांच करते हुए एफआर पेश कर दी और निचली अदालत ने 23 सितंबर, 2022 को उसे स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता की ओर से पेश प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। याचिका में कहा गया कि जांच के दौरान अनुसंधान अधिकारी ने याचिकाकर्ता का नार्को टेस्ट करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था और याचिकाकर्ता ने भी अपनी सहमति दे दी थी। इसके बावजूद संबंधित प्राधिकारी ने यह कहते हुए टेस्ट करने से इनकार कर दिया कि टेस्ट के दौरान यह सामने आया कि याचिकाकर्ता धारा प्रवाह हिंदी नहीं बोल सकता है। याचिका में कहा गया कि वह अभी भी नार्को टेस्ट के लिए तैयार है। 

ऐसे में मामले में निष्पक्ष जांच के आदेश दिए जाए। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि यदि अदालत जांच के आदेश देती है कि नया जांच अधिकारी नियुक्त कर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए मामले में अग्रिम जांच के आदेश दिए हैं। 

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