DGFT का झटका: RoDTEP दरें की आधी, राजस्थान के निर्यातकों में हाहाकार; हैंडीक्राफ्ट और जेम्स उद्योग पर मंडराया संकट
सरकार ने RoDTEP दरों को तत्काल प्रभाव से किया आधा
डीजीएफटी ने देश से निर्यात होने वाली वस्तुओं पर रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्टेड प्रोडक्ट्स की दरें की आधी। राजस्थान के निर्यातकों के लिए बड़ा झटका। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कटौती से निर्यातकों की बढ़ेगी लागत। वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ सकती है।
जयपुर। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक आदेश जारी कर देश से निर्यात होने वाली वस्तुओं पर दिए जा रहे रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्टेड प्रोडक्ट्स (RoDTEP) की दरों को तुरंत प्रभाव से आधी कर दिया है। यह फैसला राजस्थान के निर्यातकों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है, जहां हैंडीक्राफ्ट, जेम्स एंड ज्वेलरी, टेक्सटाइल्स और कृषि उत्पादों का निर्यात प्रमुख रूप से होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कटौती से निर्यातकों की लागत बढ़ जाएगी, जिससे वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ सकती है।
RoDTEP स्कीम जनवरी 2021 से लागू की गई थी, जिसके तहत केंद्र सरकार निर्यात होने वाले माल पर वसूले गए जीएसटी से इतर करों और ड्यूटीज की वापसी निर्यातकों को करती है। इनमें पेट्रोल-डीजल पर वसूले गए टैक्स, मंडी टैक्स, इलेक्ट्रिसिटी टैक्स इत्यादि शामिल हैं। यह वापसी विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सिद्धांत के आधार पर की जाती है कि ड्यूटीज और टैक्स निर्यात नहीं किए जा सकते।डीजीएफटी के महानिदेशक लव अग्रवाल द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सभी एचएस लाइनों के लिए RoDTEP दरें मौजूदा अधिसूचित दरों की 50 प्रतिशत तक सीमित कर दी गई हैं।
राजस्थान के संदर्भ में यह फैसला विशेष रूप से नुकसानदेह है, क्योंकि राज्य का निर्यात मुख्यतः लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स पर निर्भर है। जोधपुर हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भरत दिनेश ने कहा, "निर्यातकों को अभी मिल रही RoDTEP दरें भी वास्तविक गणना से बहुत कम थीं तथा अब अचानक इनको आधी कर देने से निर्यातक बड़ी परेशानी में पड़ गए हैं। सभी निर्यातक अपने विदेशी बायर्स के साथ लंबी अवधि आगे तक के रेट कॉन्ट्रैक्ट करके रखते हैं। इसके साथ ही निर्यात होने वाले माल पर लगने वाले पूरे टैक्सेज की वापसी सरकार द्वारा पूरी नहीं किए जाने से भारतीय निर्यातक वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नहीं टिक पाएंगे। सरकार को डब्ल्यूटीओ के सिद्धांत का पालन करते हुए निर्यातकों को तर्कसंगत दरों पर RoDTEP देना चाहिए।"
उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट में इस स्कीम के अंतर्गत 18,313 करोड़ रुपये तथा 2025-26 के लिए 18,232 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जबकि वर्ष 2026-27 के बजट के लिए केवल 10 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस कटौती से राजस्थान के निर्यातकों को अनुमानित रूप से करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है, खासकर जोधपुर, जयपुर और उदयपुर जैसे क्षेत्रों में जहां हैंडीक्राफ्ट और जेम्स निर्यात से लाखों रोजगार जुड़े हैं। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला वैश्विक आर्थिक मंदी के बीच निर्यात को और प्रभावित करेगा, जहां पहले से ही मांग में कमी है।
उद्योग संघों ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (FIEO) ने कहा कि यह कटौती निर्यातकों की लागत बढ़ाएगी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत को पीछे धकेल सकती है। हैंडीक्राफ्ट निर्यातक नवनीत झालानी ने बताया कि राजस्थान के निर्यातकों के लिए यह आदेश फायदेमंद नहीं बल्कि नुकसानदेह साबित होगा, क्योंकि पहले से ही कम दरों को आधा करने से उनकी लाभप्रदता पर सीधा असर पड़ेगा।

Comment List