अन्नदाता हुंकार रैली में किसानों का ऐलान : किसान केन्द्रित राजनीति और ग्राम आधारित अर्थव्यवस्था का आह्वान, जाट ने कहा- एक्सप्रेस-वे के नाम पर किसानों की सिंचित भूमि हड़प रही सरकार

रैली में सर्वसम्मति से दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए

अन्नदाता हुंकार रैली में किसानों का ऐलान : किसान केन्द्रित राजनीति और ग्राम आधारित अर्थव्यवस्था का आह्वान, जाट ने कहा- एक्सप्रेस-वे के नाम पर किसानों की सिंचित भूमि हड़प रही सरकार

युवाओं को काम दिलाने के लिए किसान केन्द्रित राजनीति एवं ग्राम आधारित अर्थरचना की मांग को मजबूती से उठाना है। रैली में सर्वसम्मति से दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। 

जयपुर। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि प्रदेश में सड़कें खस्ताहाल है और उनको सुधारने के स्थान पर कुछ मुट्ठी भर लोगों के लिए एक्सप्रेस वे तैयार हो रही है। इसमें किसानों की हजारों सिंचित भूमि को अधिग्रहण करने की तैयारियां की जा रही है। जिससे किसानों के सामने रोजगार का संकट हो जाएगा। प्रदेशभर के किसानों ने मंगलवार को बाईस गोदाम पर हुंकार रैली को संबोधित करते हुए रामपाल जाट ने कहा कि एक्सप्रेस वे जमीन से करीब 20 फीट ऊंचाई पर बनेंगे, इससे गांव एवं समाज बटेंगे। एक्सप्रेस वे में एक ओर से दूसरी तरफ जाने के लिए कई-कई किमी का सफर करना पड़ता है।  किसानों को अपने एक खेत से दूसरे खेत तक जाने के लिए अधिक समय लगेगा एवं धन का अतिरिक्त बोझÞ भी पड़ेगा। सरकार किसानों के हितों पर लगातार कुठाराघात कर रही है। उन्होंने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कृषि भूमि के संरक्षण, खेत को पानी, फसल को दाम और युवाओं को काम दिलाने के लिए किसान केन्द्रित राजनीति एवं ग्राम आधारित अर्थरचना की मांग को मजबूती से उठाना है। रैली में सर्वसम्मति से दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। 

पहले प्रस्ताव में पूंजीवादी और सामंती व्यवस्था को बेरोजगारी बढ़ने का जिम्मेदार ठहराते हुए कहा गया कि गांवों से लघु एवं कुटीर उद्योगों के समाप्त होने से युवा रोजगार के लिए भटकने को मजबूर हैं। समाधान के रूप में गांवों को स्वायत्तता देते हुए ग्राम उद्योगों को बढ़ावा देने, कृषि उपज के लाभकारी दाम तय करने और ग्रामीण पलायन रोकने की मांग रखी गई। भारतमाला परियोजना के तहत प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे को दोहरे मापदंडों का उदाहरण बताते हुए कहा गया कि इससे किसानों की लागत और दूरी बढ़ेगी।

 रैली में दूसरा प्रस्ताव किसानों ने अपने उत्पादों का मूल्य स्वयं तय करने का संकल्प लिया। रैली में सरसों का भाव 6500 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया और इससे कम दाम पर बिक्री न करने का निर्णय लिया गया। किसानों ने बताया कि सी 2 लागत के अनुसार सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य इससे अधिक होना चाहिए, फिर भी किसानों ने व्यावहारिक दृष्टि से यह दर तय की है। इसके साथ ही जाट ने कहा कि अतिवृष्टि से नष्ट फसलों का आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत मुआवजा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का भुगतान, प्रस्तावित 9 ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे निरस्त करने और सड़कों के बजाय सिंचाई को प्राथमिकता देने तक संघर्ष जारी रहेगा। रैली के बाद किसानों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया जिसे पुलिस ने रोका। इसके बाद 11 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल की मुख्य सचिव वे वार्ता कराई गई। 

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