गणगौर पूजन का शुभारंभ, युवतियां सुबह-सुबह करने लगीं ईसर-गणगौर की पूजा
गणगौर पूजन 2026: गुलाबी नगरी में सौभाग्य और श्रद्धा का उल्लास
जयपुर में होली के बाद गणगौर पर्व की पारंपरिक शुरुआत हो गई है। विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य और कुंवारी कन्याएं सुयोग्य वर की कामना के साथ ईसर-गणगौर का पूजन कर रही हैं। सुबह बगीचों से फूल चुनकर और पारंपरिक लोकगीतों के बीच सामूहिक पूजन से राजधानी का वातावरण भक्तिमय हो गया है।
जयपुर। होली के बाद सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक माने जाने वाला गणगौर पर्व का पूजन शुरू हो गया है। राजशाही परंपरा से चला आ रहा यह पर्व विवाहित महिलाओं के साथ-साथ कुंवारी कन्याओं द्वारा भी बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।
मान्यता है कि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए गणगौर का व्रत और विशेष पूजा करती हैं, वहीं कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने की कामना से यह व्रत रखती हैं। होलिका दहन के अगले दिन से ही महिलाओं ने गणगौर पूजन आरंभ कर दिया है। सु सुबह शहर में युवतियां और नवविवाहित महिलाएं तड़के उठकर फूल चुनने के लिए बगीचों में पहुंचीं। इसके बाद घर का पवित्र जल कलश में भरकर ईसर-गणगौर का विधिवत पूजन किया गया। महिलाएं पूजा के लिए दूब भी लेकर आईं और पारंपरिक गीत गाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
पूजन के दौरान “गौर ये गणगौर माता खोल किवाड़ी, बाहर ऊबी थारी पूजन वाली”, “गोर-गोर गोमती, जोड़ा पूजा पार्वती का” जैसे पारंपरिक गीत गूंजते रहे।
राजधानी में कई स्थानों पर गणगौर पूजन सामूहिक रूप से भी किया जा रहा है। श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक गणगौर पूजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां भाग ले रही हैं।

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