पीएम मोदी ने दी कर्नाटक को बड़ी सौगात : आदिचुनचनगिरि में नए तीर्थस्थल का किया उद्घाटन, दिवंगत संत श्री बालगंगाधरनाथ स्वामीजी को है समर्पित
आध्यात्मिक संगम: पीएम मोदी ने किया गुरु भैरवैक्य मंदिर का उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कर्नाटक के मांड्या में ऐतिहासिक आदिचुनचनगिरि मठ परिसर में नवनिर्मित मंदिर का उद्घाटन किया। यह तीर्थस्थल संत बालगंगाधरनाथ स्वामीजी की विरासत और नाथ परंपरा को समर्पित है। शिक्षा और समाज सेवा के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध यह मठ अब दक्षिण भारत में सांस्कृतिक पर्यटन का प्रमुख स्तंभ बनेगा।
बेंगलुरु। कर्नाटक के मांड्या जिले के आदिचुनचनगिरि ऐतिहासिक मठ परिसर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर का उद्घाटन किया। यह तीर्थस्थल दिवंगत संत श्री बालगंगाधरनाथ स्वामीजी को समर्पित है जो एक स्मारक होने के साथ-साथ उस विरासत को दर्शाता है जो दशकों से आदिचुनचनगिरि मठ द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में चलाई जा रही है। अनेक भक्तों के लिए, यह मात्र पत्थर और अनुष्ठानों से बनी एक संरचना नहीं है बल्कि उस दर्शन की पुष्टि है जिसने संस्था की सीमाओं से परे भी कई लोगों के जीवन को आकार दिया है।
यह उद्घाटन समारोह शैव धर्म की नाथ परंपरा से मठ के सदियों पुराने जुड़ाव की पृष्ठभूमि में आयोजित किया गया जहां गुरु-शिष्य परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही आध्यात्मिक साधना को जोड़ने वाला केंद्रीय सूत्र बनी हुई है। इस दृष्टिकोण के साथ नया मंदिर किसी अतिरिक्त निर्माण की तरह नहीं बल्कि एक निरंतर चली आ रही परंपरा का विस्तार लगता है। जैसे-जैसे अनुष्ठान संपन्न होते गए और पहाड़ी परिसर में मंत्रोच्चार गूंजते गए, वातावरण में भक्ति एवं समारोह का एक परिचित मिश्रण झलकने लगा। श्रद्धालु आज सुबह से ही इकट्ठा होने लगे थे और उस स्थान के धार्मिक अनुष्ठानों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति से जीवंत होने का इंतजार कर रहे थे।
आदिचुनचनगिरि मठ न केवल अपने आध्यात्मिक महत्व के लिए बल्कि जैव विविधता से भरपूर पहाड़ी श्रृंखलाओं के बीच स्थित अपने पारिस्थितिक परिवेश के लिए भी जाना जाता है। यह एक अद्वितीय स्थान रखता है जहां आस्था, परंपरा और सार्वजनिक सेवा का संगम होता है। नए तीर्थस्थल के उद्घाटन के साथ, मठ में तीर्थयात्रियों की संख्या में वृद्धि होने की उम्मीद है जिससे दक्षिणी कर्नाटक में एक प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में इसकी भूमिका और मजबूत होगी।

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