डीके सुरेश का केंद्र पर हमला: कांग्रेस बंगाल की तरह कर्नाटक में नहीं देगी SIR की अनुमति, कार्यकर्ताओं के लिए जागरूकता बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

एसआईआर प्रक्रिया पर बवाल

डीके सुरेश का केंद्र पर हमला: कांग्रेस बंगाल की तरह कर्नाटक में नहीं देगी SIR की अनुमति, कार्यकर्ताओं के लिए जागरूकता बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
पूर्व सांसद डी.के. सुरेश ने कहा कि कांग्रेस कर्नाटक में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) को पश्चिम बंगाल की तरह लागू नहीं होने देगी, क्योंकि इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की। साथ ही, उन्होंने केंद्र सरकार पर चुनावी प्रक्रिया और अर्थव्यवस्था को लेकर तीखा हमला बोला।

बेंगलुरु। पूर्व सांसद डी. के. सुरेश ने सोमवार को कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) जिस तरह पश्चिम बंगाल में लागू की गयी, कांग्रेस कर्नाटक में उस तरह इसे लागू नहीं होने देगी, क्योंकि इससे मतदाताओं के अधिकारों पर असर पड़ सकता है। सुरेश ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों को अपने मतदान अधिकारों की रक्षा के लिए सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एसआईआर प्रक्रिया को लेकर किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति से निपटने और राज्य में मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए जागरूकता बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रही है। चुनाव आयोग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग उनके हाथों में है। हमें नहीं पता कि वे क्या करेंगे।” साथ ही उन्होंने प्रस्तावित चुनावी प्रक्रिया को लेकर आशंका व्यक्त की।

डी के सुरेश ने आरोप लगाया कि 12 साल सत्ता में रहने के बावजूद केंद्र सरकार ने ‘दो औद्योगिक घरानों’ के हितों की रक्षा के लिए आम जनता पर बोझ डाल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया, “ केंद्र सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने ये टिप्पणियां किस संदर्भ में कीं। अगर अर्थव्यवस्था संकट में है, तो इसके लिए उनकी सरकार जिम्मेदार है।” भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं को भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसाया जाता है, लेकिन सत्ताधारी पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें ‘वाशिंग मशीन’ में धो दिया जाता है। ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के मुद्दे पर सुरेश ने कहा कि केंद्र को यह स्पष्ट करना होगा कि ऐसी व्यवस्था में शासन और न्याय व्यवस्था कैसे काम करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि एक साथ चुनाव कराना ‘बार-बार राजनीतिक अभियान चलाने के बजाय एक ही झटके में सब कुछ खत्म करने’ का प्रयास है। 

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