राजस्थान विधानसभा के 75वें वर्ष की शुरुआत: नए प्रतीक चिन्ह का विमोचन, 13 द्वारों को मिले ऐतिहासिक नाम
सोमवार को अमृत महोत्सव कार्यक्रमों की शुरुआत
राजस्थान विधानसभा के 75वें वर्ष पर राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने नए प्रतीक चिन्ह का विमोचन किया। प्रतीक चिन्ह में खेजड़ी, गोडावण और ऊंट जैसी सांस्कृतिक आकृतियां शामिल हैं। इसके साथ ही विधानसभा के 13 द्वारों का नामकरण कर अमृत महोत्सव कार्यक्रमों की औपचारिक शुरुआत की गई।
जयपुर। विधानसभा के 75वें वर्ष पर प्रतीक चिन्ह का विमोचन, 13 द्वारों का हुआ नामकरण विधानसभा लोकतंत्र का पवित्र सदन, नया प्रतीक चिन्ह राजस्थान की संस्कृति का द्योतक” राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े राजस्थान विधानसभा के 75वें वर्ष के अवसर पर सोमवार को राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विधानसभा के नए प्रतीक चिन्ह का विमोचन किया तथा विधानसभा भवन के 13 द्वारों के नामकरण पट्टिका का अनावरण किया। इसके साथ ही विधानसभा के अमृत महोत्सव कार्यक्रमों की औपचारिक शुरुआत हुई।
राज्यपाल ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का पवित्र सदन है और राजस्थान विधानसभा का गौरवशाली इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि नया प्रतीक चिन्ह राजस्थान की संस्कृति, परंपरा और जनभावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है। प्रतीक चिन्ह में शामिल खेजड़ी, गोडावण, ऊंट और विधानसभा भवन की आकृतियां राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान और संघर्षशील जीवनशैली को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि खेजड़ी राजस्थान का कल्पवृक्ष है और यह त्याग तथा पर्यावरण संरक्षण की परंपरा का प्रतीक है। राज्यपाल ने शिक्षा व्यवस्था पर भी जोर देते हुए कहा कि देश शिक्षा से आगे बढ़ता है और व्यवहारिक शिक्षा को बढ़ावा देने की जरूरत है। “विधानसभा करोड़ों नागरिकों की आशाओं का केंद्र” — वासुदेव देवनानी विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि राजस्थान विधानसभा का नया प्रतीक चिन्ह लोकतांत्रिक परंपराओं, जनआकांक्षाओं और संवैधानिक मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विधानसभा भवन करोड़ों नागरिकों की आशाओं का पावन केंद्र है।

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