जयपुर हाईवे को सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम : हाईवे से हटेंगे ब्लैक स्पॉट, अतिरिक्त एम्बुलेंस लगाने की दी मंजूरी

संसाधनों की कमी को भी दूर करने के निर्देश 

जयपुर हाईवे को सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम : हाईवे से हटेंगे ब्लैक स्पॉट, अतिरिक्त एम्बुलेंस लगाने की दी मंजूरी

जिले में हाईवेज पर सड़क हादसों को कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे। जिला सड़क सुरक्षा समिति ने 2024 में 88 और 2025 में 17 ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित कर सुधार। अतिरिक्त एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड तैनात। अवैध कट, अतिक्रमण रोकने, आपातकालीन कॉल और चालक प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जा रहा।

जयपुर। सड़क हादसों में कमी लाने के लिए जयपुर जिले में हाईवेज को सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। जिला सड़क सुरक्षा समिति ने दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों को चिन्हित करते हुए न केवल ब्लैक स्पॉट्स का निस्तारण किया है, बल्कि संसाधनों की कमी को भी दूर करने के निर्देश दिए हैं। समिति के अनुसार वर्ष 2024 में जिले में 88 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए थे, जिनमें से सभी पर सुधारात्मक कार्य किए जा चुके हैं। इनमें 34 स्थानों पर फ्लाईओवर, अंडरपास जैसे स्थायी समाधान विकसित किए गए, जबकि 53 स्थानों पर अस्थायी सुधार कर हादसों की संभावना कम की गई। वहीं वर्ष 2025 में 17 नए ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित किए गए हैं, जिन पर जल्द ही कार्य शुरू होगा।

हाईवेज पर संसाधनों की कमी भी हादसों की बड़ी वजह बन रही है। जयपुर-बांदीकुई एक्सप्रेस-वे पर फिलहाल केवल एक एम्बुलेंस उपलब्ध है। जिला प्रशासन के निर्देश पर अब एडवांस लाइफ सपोर्ट युक्त अतिरिक्त एम्बुलेंस लगाने की मंजूरी दी गई है। इसके अलावा कई हाईवेज पर फायर ब्रिगेड की अनुपस्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। जयपुर-अजमेर हाईवे पर पहले तीन टोल प्लाजा पर फायर ब्रिगेड तैनात थी, लेकिन वर्तमान में एक भी फायर ब्रिगेड उपलब्ध नहीं है। इसी तरह दिल्ली-अजमेर हाईवे के महला और चंदवाजी क्षेत्र में क्रेन की कमी के कारण दुर्घटना के बाद राहत कार्य प्रभावित होते हैं।

सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ की रिपोर्ट में यह सामने आया है कि अवैध कट और अतिक्रमण हादसों के प्रमुख कारण हैं। जयपुर-आगरा और जयपुर-कोटा हाईवे पर बने अवैध कट विशेष रूप से खतरनाक साबित हो रहे हैं। अब इन कटों को क्रैश बैरियर लगाकर बंद करने की योजना है। वहीं कई स्थानों पर होटल-ढाबा संचालकों द्वारा किए गए अतिक्रमण भी जोखिम बढ़ा रहे हैं।

आपातकालीन सेवाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। जयपुर-किशनगढ़ हाईवे पर लगे इमरजेंसी कॉल बॉक्स वर्तमान में काम नहीं कर रहे हैं, जिसके चलते अब हेल्पलाइन 1033 के प्रचार पर जोर दिया जा रहा है। समिति आगामी बैठक में वाहन चालकों के प्रशिक्षण, ज्वलनशील पदार्थ ढोने वाले वाहनों के लिए समय और गति सीमा तय करने तथा शहर में यातायात जाम कम करने की रणनीति पर भी निर्णय लेगी। इन उपायों से उम्मीद है कि हाईवेज पर हादसों में प्रभावी कमी लाई जा सकेगी।

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