राजनीति में कभी नहीं होता पूर्ण विराम : सक्रिय लोग समाज और देश की प्रगति में देते है योगदान, मोदी ने कहा- संसद के दोनों सदन एक-दूसरे के पूरक
सदन में सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है
मोदी ने राज्यसभा से सेवानिवृत्त हो रहे 59 सदस्यों को विदाई देते हुए कहा कि राजनीति में कभी पूर्ण विराम नहीं होता और जनसेवा निरंतर चलती रहती है। खड़गे, पवार व देवेगौड़ा के अनुभव को प्रेरणादायक बताया। खड़गे ने भी सार्वजनिक जीवन को निरंतर सेवा बताया।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि राजनीति में कभी पूर्ण विराम नहीं होता और इसमें सक्रिय लोग हमेशा समाज और देश की प्रगति में अपना योगदान देते रहते हैं। मोदी ने अगले महीने राज्यसभा से सेवानिवृत होने वाले 59 सदस्यों को भावभीनी विदायी देते हुए यह बात कही। उच्च सदन में सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है और हर दो वर्ष में इसके एक तिहाई सदस्य सेवानिवृत होते हैं, जिनका स्थान नये सदस्य लेते हैं, जिससे यह सदन अनवरत सक्रिय रहता है। मोदी ने कहा कि राजनीति में कभी पूर्ण विराम नहीं होता और देश तथा समाज को नेताओं का सक्रिय योगदान हमेशा मिलता रहेगा। उन्होंने खड़गे , गौड़ा और पवार का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सदस्यों की आधी से अधिक उम्र संसदीय जिम्मेदारी निभाते हुए बीती है और ये सभी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि इन सदस्यों को जब भी जो भी जिम्मेदारी मिली है, उसके प्रति समर्पित कैसे रहना है। यह उनसे सीखा जा सकता है।
खड़गे ने अपने भाषण में जब कहा कि मोदी आजकल अपने भाषणों में शेरो शायरी नहीं करते, तो खड़गे के भाषण के बाद मोदी ने कहा कि वह खड़गे की अपेक्षा के अनुसार एक शेर के जरिये अपनी बात रखते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि कर्म ऐसा करो मन में जहां से गुजरें तुम्हारी नजरें ,उधर से तुम्हें सलाम आये। उपसभापति हरिवंश के बारे में उन्होंने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया और सबका विश्वास जीतने का प्रयास किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हरिवंश का लंबा अनुभव है और जब सदन नहीं चलता है, तो युवाओं के साथ इनका संवाद चलता रहता है, देश के प्रति संवेदनाएं करने का काम चलता रहता है। हर कोने में काम किया है। मोदी ने कहा कि रामदास अठावले सदाबहार है, वह आगे भी लोगों की जीवन में हास्य और विनोद परोसते रहेंगे । प्रधानमंत्री ने उम्मीद जतायी कि नये सांसदों को पुराने सांसदों के अनुभव का लाभ मिलता रहेगा। संसद के दोनों सदनों को एक दूसरे का पूरक बताते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में जब भी महत्वपूर्ण निर्णय लेना होता है, तो हम दूसरा विचार जानते हैं और इस दूसरे विचार की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि इसी तरह दोनों सदनों में यहकाम चलता है और इससे बहस तथा विचारों को एक नया आयाम मिलता है और निर्णय प्रक्रिया मजबूत बनती है। उन्होंने कहा कि यही हमारे लोकतंत्र की मजबूती है।
खड़गे ने अपने संबोधन की शुरूआत एक शेर से करते हुए कहा कि कहां से शुरू करें, कुछ समझ नहीं आता है, आपकी विदाई के जिक्र से दिल भर आता है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन के लोग कभी रिटायर्ड नहीं होते। मैं 50 वर्ष से अधिक समय से सार्वजनिक जीवन में हूं और राज्यसभा का मेरा अनुभव खट्टा-मीठा रहा है। उन्होंने कहा कि इस सदन को सार्थक बनाने के लिए और अधिक कुछ करने की जरूरत है, जिससे यह समाज को और योगदान दे सकें। नेता विपक्ष ने देवेगौड़ा का जिक्र करते हुए हल्के अंदाज में कहा कि उन्होंने मोहब्बत हमारे साथ की, लेकिन शादी मोदी साहब के साथ की। उन्होंने कहा कि श्री शरद पवार राष्ट्रीय नेता रहे हैं और उनका लंबा अनुभव रहा है। उन्होंने कहा कि अठावले अपनी कविता के रूप में मोदी का ही गुणगान करते हैं, उनको और कोई कविता नहीं आती है। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह एक दशक तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और राज्यसभा में भी उन्होंने अच्छा काम किया।
खड़गे ने कहा कि कांग्रेस सदस्यों शक्ति सिंह गोहिल और नीरज डांगी ने अपनी योग्यता और क्षमता के साथ योगदान दिया है तथा रजनी पाटिल समाज और बच्चों के बारे में काम करती रही हैं। उन्होंने कहा कि साकेत गोखले ने योगदान दिया है। उप सभापति हरिवंश के बारे में उन्होंने कहा कि वह शालीन और शिष्ट व्यवहार वाले नेता हैं और उन्होंने अपने कामों को हमेशा पूरा किया है। सदन में सत्ता और विपक्ष की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने का कि अच्छे कानून में दोनों पक्षों का योगदान होता है और सभी विधेयकों पर बराबर बहस होनी चाहिए तथा सदस्यों को समान अवसर दिये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही के दिन बढाये जाने चाहिए। उन्होंने कार्यवाही से शब्दों को हटाये जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई बार इसमें बहुत सख्ती बरती जाती है। हरिवंश ने सेवा निवृत सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जतायी कि ये सभी देश को इसी तरह राहत दिखाते रहेंगे।

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