जयपुर की पहली विरासत हुई थी यूनेस्को की सूची में शामिल, इतिहास में आज का दिन जंतर-मंतर के नाम

यहां जंतर का अर्थ है यंत्र और मंतर यानि गणनाएं।

जयपुर की पहली विरासत हुई थी यूनेस्को की सूची में शामिल, इतिहास में आज का दिन जंतर-मंतर के नाम

जंतर-मंतर स्मारक की अधीक्षक प्रतिभा यादव ने बताया कि 31 जुलाई, 2010 को स्मारक यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया था। इसके बाद से यहां पर्यटकों की सुविधार्थ विभिन्न कार्य करवाए गए हैं। 

जयपुर। महाराजा सवाई जयसिंह ने गुलाबी नगरी में ग्रहों, नक्षत्रों एवं अन्य आकाशीय पिण्डों के अध्ययन के लिए जंतर-मंतर स्मारक (वेधशाला) का निर्माण करवाया था। यहां जंतर का अर्थ है यंत्र और मंतर यानि गणनाएं। देश में बनाई गई पांच जंतर-मंतर स्मारक में से केवल जयपुर स्थित स्मारक के यंत्र सही से कार्य कर रहे हैं। अपनी इसी विशेषताओं के चलते 31 जुलाई, 2010 को यूनेस्को ने इसे विश्व विरासत की सूची में शामिल किया था। तब से लेकर अब तक यहां पर्यटकों की सुविधार्थ कई कार्य करवाए गए हैं। 

14 साल में 1,16,94,001 पर्यटकों ने की विजिट 
जंतर-मंतर स्मारक प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार साल 2010 से 2023-24 (अप्रैल से मार्च तक) तक इन 14 साल में फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका, श्रीलंका, आॅस्ट्रेलिया, दुबई सहित अन्य देशों से 22,32,826 विदेशी पावणों ने विश्व विरासत देखी तो वहीं दूसरी ओर देश के विभिन्न राज्यों से इन वर्षों के दौरान 94 लाख 61 हजार 175 घरेलू पर्यटकों ने स्मारक के यंत्रों की कार्य प्रणाली के बारे में जानकारी ली। 

यहां सुनते हैं स्मारक और यंत्रों की गाथा  
स्मारक के यूनेस्को की लिस्ट में शामिल होने के बाद पर्यटकों की सुविधार्थ इंटरप्रिटेशन सेंटर बनवाया गया। यहां पर्यटक स्मारक के यंत्रों सहित इसके इतिहास की जानकारी प्राप्त करते हैं। यहां विभिन्न यंत्रों के मॉडल और महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय के साथ दो अन्य मेनिक्वीन भी डिस्प्ले हैं। स्मारक में विभिन्न यंत्रों के पास क्यूआर कोड भी लगाए हैं। इससे पर्यटक तकनीक के दौर में इन्हें स्कैन कर यंत्रों की कार्यप्रणाली के विषय में जानकारी ले सकें।

जिन उपकरणों से किया जीर्णोद्धार
1901 में जयपुर राज्य के शाही अभियंता लेफ्टिनेंट आर्थर फोलियट गैरेट ने जिन उपकरणों की सहायता से स्मारक का जीर्णोद्धार कार्य करवाया था। उन उपकरणों को देने के लिए साल 2016-17 में गैरेट के रिश्तेदार स्मारक आए थे। इन उपकरणों में पीतल के 14 चांदे, पोईंटर, स्केल, दिक्सूचक, भाजक, ड्राइंग, पेन होल्डर, एक्सटेंशन आदि शामिल थे। 

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जंतर-मंतर स्मारक की अधीक्षक प्रतिभा यादव ने बताया कि 31 जुलाई, 2010 को स्मारक यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया था। इसके बाद से यहां पर्यटकों की सुविधार्थ विभिन्न कार्य करवाए गए हैं। 

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