कमजोर लंग्स और सांस की पुरानी बीमारियों में कारगर है ऑक्सीजन थेरेपी, बेहतर परिणाम के लिए इसे दिन में कम से कम 18 से 24 घंटे लगातार लगाना जरूरी
लंग्स खुद से यह लेवल मेंटेन नहीं कर पाते
सीओपीडी, अस्थमा और आईएलडी जैसे मरीजों में कम ऑक्सीजन लेवल होने पर लॉन्ग टर्म ऑक्सीजन थेरेपी जरूरी। विशेषज्ञों के अनुसार ऑक्सीजन एक दवा है, इसलिए डॉक्टर की सलाह से 18–24 घंटे देना चाहिए। वेट ऑक्सीजन और साफ-सफाई जरूरी।
जयपुर। लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों जैसे सीओपीडी, अस्थमा या आईएलडी की वजह से कई बार मरीजों के लंग्स इतने कमजोर हो जाते हैं कि वे सामान्य तरीके से सांस नहीं ले पाते। हार्ट और ब्रेन को सही से काम करने के लिए कम से कम 85 से 90 प्रतिशत ऑक्सीजन लेवल की जरूरत होती है। जब लंग्स खुद से यह लेवल मेंटेन नहीं कर पाते तब ऐसे मरीजों को घर पर ही लॉन्ग टर्म ऑक्सीजन थेरेपी यानी बाहरी ऑक्सीजन सपोर्ट की सख्त जरूरत पड़ती है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेने और उनके सुझाए डोज व समय के अनुसार ही ऑक्सीजन दी जाए। लापरवाही से जान का खतरा बढ़ सकता है।
ऑक्सीजन भी एक तरह की दवा है :
वरिष्ठ श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. शुभ्रांशु ने बताया कि ऑक्सीजन भी एक तरह की दवा है, इसलिए इसका फ्लो रेट और डोज हमेशा डॉक्टर ही तय करते हैं। इसे दिन में केवल एक-दो घंटे लगाने से कोई खास फायदा नहीं होता, बल्कि बेहतर परिणाम के लिए इसे दिन में कम से कम 18 से 24 घंटे लगातार लगाना जरूरी है। घर पर ऑक्सीजन सप्लाई के लिए मुख्य रूप से ऑक्सीजन सिलेंडर या ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन का प्रयोग किया जाता है। कंसंट्रेटर हवा से सीधा ऑक्सीजन लेकर उसे फिल्टर करता है और मरीज को लगातार 90 से 95 प्रतिशत शुद्ध ऑक्सीजन देता है।
तकलीफ बढ़ने पर वेट ऑक्सीजन दें :
डॉ. शुभ्रांशु ने बताया कि लंबे समय तक ड्राई ऑक्सीजन लेने से मरीज का गला और नेजल पैसेज सूखने लगता है। इस तकलीफ से बचने के लिए हमेशा पानी के जरिए वेट ऑक्सीजन दी जानी चाहिए। ऑक्सीजन को नुकसान होने से बचाने के लिए कुछ खास प्रिजर्विंग वाल्व भी आते हैं जो सिर्फ सांस अंदर लेते वक्त ही ऑक्सीजन रिलीज करते हैं। अत्यधिक गंभीर मरीजों में सीधे गले में ट्यूब डालकर भी ऑक्सीजन दी जाती है।
इन्फेक्शन से बचाव के लिए हाईजीन और देखरेख जरूरी :
घर पर ऑक्सीजन मशीन का प्रयोग करते समय साफ-सफाई का खास ध्यान रखना पड़ता है। मशीन की बोतल का पानी रोज न बदलने और ट्यूब की सफाई न करने से लंग्स में बैक्टीरियल या फंगल इन्फेक्शन होने का खतरा अधिक होता है। ऐसे मरीजों की इम्युनिटी पहले से ही कमजोर होती है इसलिए छोटी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है।

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