राजस्थान की झांकी ने जीता पॉपुलर चॉइस पुरस्कार, गुजरात प्रथम श्रेणी में तथा उत्तर प्रदेश को द्वितीय स्थान

ललित कला अकादमी के सचिव रजनीश हर्ष भी उपस्थित

राजस्थान की झांकी ने जीता पॉपुलर चॉइस पुरस्कार, गुजरात प्रथम श्रेणी में तथा उत्तर प्रदेश को द्वितीय स्थान

77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में निकाली गई राजस्थान की झांकी ने लोकप्रिय पसंद का तृतीय पुरस्कार जीता। भारत के रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ से राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव पर्यटन, कला, साहित्य एवं संस्कृति प्रवीण गुप्ता ने नई दिल्ली के महिपालपुर स्थित रक्षा संस्थान में यह पुरस्कार ग्रहण।

जयपुर। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में निकाली गई राजस्थान की झांकी ने लोकप्रिय पसंद (पॉपुलर चॉइस) का तृतीय पुरस्कार जीता है। भारत के रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ से राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव पर्यटन, कला, साहित्य एवं संस्कृति प्रवीण गुप्ता ने शुक्रवार को नई दिल्ली के महिपालपुर स्थित रक्षा संस्थान में यह पुरस्कार ग्रहण किया। गुजरात को पॉपुलर चॉइस श्रेणी में प्रथम तथा उत्तर प्रदेश को द्वितीय स्थान मिला है। अतिरिक्त मुख्य सचिव के साथ पुरस्कार ग्रहण करने के अवसर पर सयुंक्त शासन सचिव कला, साहित्य एवं संस्कृति अनुराधा गोगीया एवं ललित कला अकादमी के सचिव रजनीश हर्ष भी उपस्थित रहे।

अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता ने बताया कि राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में और उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के निर्देशन में गणतंत्र दिवस परेड 2026 में बीकानेर की सदियों पुरानी उस्ता कला से प्रेरित राजस्थान की झांकी ने सुनहरा अध्याय लिखते हुए पॉपुलर चॉइस का तृतीय पुरस्कार जीता है। उन्होंने बताया कि मायगॉव प्लेटफॉर्म पर देशव्यापी जनमतदान के माध्यम से गुजरात को प्रथम स्थान, उत्तर प्रदेश को द्वितीय स्थान और राजस्थान को तृतीय स्थान मिला है।

उल्लेखनीय है कि गणतंत्र दिवस परेड में "रेगिस्तान का सुनहरा स्पर्श" शीर्षक से राजस्थान कला, साहित्य एवं संस्कृति विभाग की ओर से बीकानेर की स्वर्ण कला (उस्ता कला) से सुसज्जित इस झांकी ने अपनी जटिल शिल्पकारी, शाही विरासत और सांस्कृतिक गहराई से लाखों लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। राजस्थान की रेत से लेकर कर्तव्य पथ तक, बीकानेर के कारीगरों ने यह प्रदर्शित किया कि कैसे भारत की पारंपरिक कलाएँ सांस्कृतिक गौरव, आत्मनिर्भरता और सॉफ्ट पावर की रीढ़ बनी हुई हैं। जनता की जबरदस्त प्रतिक्रिया ने इस बात की पुष्टि की है कि भारत की आत्मा उसकी विरासत, शिल्प कौशल और लोगों में बसती है।

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