बैंकों में पाँच दिवसीय सप्ताह की माँग पर संग्राम : लगातार चौथे दिन ठप रही बैंकिंग व्यवस्था, राजस्थान में करोड़ों का कारोबार प्रभावित
लोगों को रोजमर्रा के खर्चों के लिए नकदी नहीं मिल पा रही
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के आह्वान पर मंगलवार को देशव्यापी बैंक हड़ताल ने राजस्थान सहित पूरे देश की बैंकिंग सेवाओं को पूरी तरह पंगु बना दिया। 5 दिवसीय सप्ताह लागू करने की सरकार की कथित वादाखिलाफी के विरोध में, सार्वजनिक, निजी, सहकारी, ग्रामीण और विदेशी बैंकों के चपरासी से लेकर सहायक महाप्रबंधक स्तर तक के सभी अधिकारी और कर्मचारी सामूहिक हड़ताल पर रहे।
जयपुर। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के आह्वान पर मंगलवार को देशव्यापी बैंक हड़ताल ने राजस्थान सहित पूरे देश की बैंकिंग सेवाओं को पूरी तरह पंगु बना दिया। 'पांच दिवसीय सप्ताह' लागू करने की सरकार की कथित वादाखिलाफी के विरोध में, सार्वजनिक, निजी, सहकारी, ग्रामीण और विदेशी बैंकों के चपरासी से लेकर सहायक महाप्रबंधक स्तर तक के सभी अधिकारी और कर्मचारी सामूहिक हड़ताल पर रहे। यह हड़ताल 24, 25 और 26 तारीख के सार्वजनिक अवकाश के तुरंत बाद हुई, जिसके कारण प्रदेश में बैंक शाखाएं लगातार चौथे दिन बंद रहीं। इस अभूतपूर्व बंदी से राजस्थान में करोड़ों रुपये का सामान्य बैंकिंग कारोबार और वित्तीय लेनदेन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
जयपुर में, बैंककर्मियों ने अंबेडकर सर्किल स्थित एलआईसी बिल्डिंग के पास एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया, जिसे बैंककर्मी नेता और राजस्थान प्रदेश बैंक एम्प्लाइज यूनियन (AIBEA) के उप महासचिव, सूरज भान सिंह आमेराऔर रामअवतार जाखड़, महेश मिश्रा सहित अनेक बैंक संगठन नेताओं ने संबोधित किया।
राजस्थान में सार्वजनिक क्षेत्र के लगभग 12 राष्ट्रीयकृत बैंक सक्रिय हैं। प्रदेश भर में इन बैंकों की कुल लगभग 7,000 से 8,000 शाखाएँ होने का अनुमान है, जो आज पूरी तरह बंद रहीं। ग्राहकों की परेशानी और ठप क्लीयरिंग चार दिन की लगातार बंदी ने आम ग्राहकों की कमर तोड़ दी।
मुख्य परेशानिया
नकदी संकट: एटीएम मशीनों में नकदी खत्म हो गई, जिससे लोगों को रोजमर्रा के खर्चों के लिए नकदी नहीं मिल पा रही है।
लेनदेन ठप: जमा, निकासी, चेक जमा करना, डीडी बनवाना और सरकारी लेनदेन जैसे महत्वपूर्ण कार्य रुक गए हैं।
चेक क्लीयरिंग: अनुमानित तौर पर राजस्थान में 4 लाख से अधिक चेक क्लीयरिंग के लिए अटक सकते हैं, जिनका कुल मूल्य करोड़ों रुपये होने का अनुमान है, जिससे व्यापारिक भुगतान में देरी होगी।
प्रभावी डिजिटल भुगतान: UPI और नेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएँ काम करती रहीं, लेकिन जो ग्राहक सीधे बैंक शाखाओं पर निर्भर थे, उन्हें भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बैंक यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार बैंकों में पाँच दिवसीय सप्ताह लागू करने की अपनी सहमति पर कायम नहीं रहती है, तो भविष्य में और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

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