मरु मेला शोभायात्रा में आकर्षक का केंद्र बनी राजशाही पगड़ी : सात समंदर पार से आए विदेशी, अचलदास डांगरा को बंदील में देख अभिभूत
विदेशी मेहमानों का ध्यान अपनी ओर खींचा
विश्व प्रसिद्ध मरु महोत्सव की शोभायात्रा में अचलदास डांगरा का पारंपरिक जैसलमेरी बंदील आकर्षण केंद्र रहा। सुनहरे गोटे और किनारी वाली राजाशाही पगड़ी ने स्थानीय और विदेशी सैलानियों का ध्यान खींचा। फ्रांस के पर्यटक भी इसकी कलात्मकता देखकर अभिभूत हुए और फोटो खिंचवाए।
जैसलमेर। विश्व प्रसिद्ध मरु महोत्सव की शोभायात्रा के दौरान शहर के अचलदास डांगरा विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। शोभायात्रा में सदियों पुरानी पारंपरिक जैसलमेरी बंदील, पगड़ी धारण किये डांगरा जैसलमेर की राजशाही परम्परा के समय की पगड़ी की याद दिला रहे थे। सुनहरे गोटे और किनारी वाली इस राजाशाही बंदील ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि सात समंदर पार से आए विदेशी मेहमानों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा। शोभायात्रा में शामिल फ्रांस के पर्यटकों ने जब अचलदास डांगरा को इस दुर्लभ और ऐतिहासिक बंदील में देखा तो वे अपनी उत्सुकता रोक नहीं पाए। सैलानियों ने अचलदास को बताया कि उन्होंने सोने के गोटे और किनारी वाली ऐसी कलात्मक बंदील पहली बार देखी है।
राजाशाही ठाठ-बाठ को दर्शाती पगड़ी को देख विदेशी मेहमान अभिभूत नजर आए और उन्होंने इस पल को यादगार बनाने के लिए उनके साथ जमकर फोटो खिंचवाए। डांगरा ने बताया कि यह बंदील उनकी अनमोल विरासत है, जो जैसलमेर की समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली इतिहास को जीवंत करती है। मरु महोत्सव के रंगारंग उत्सव में यह बंदील पारंपरिक शान और स्थानीय संस्कृति के संगम का प्रतीक बनकर उभरी।

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