मानवता की अनूठी मिसाल पेश : ग्रीन कॉरिडोर बना कर किडनी जयपुर भेजी, श्रमिक अनेसिंह दुनिया छोड़ने से पहले तीन लोगों को दे गया नव जीवन
प्राप्त अंगों को तीन रोगियों को आवंटित किया गया
एम्स जोधपुर में वर्ष 2026 के पहले अंगदान कैडेवरिक डोनेशन को चिह्नित कर पाली जिले के 58 वर्षीय श्रमिक अनेसिंह के परिवार ने मानवता की अनूठी मिसाल पेश की। उनके निधन के बाद परिवार ने अंगदान का नेक फैसला लिया, जिससे गंभीर रूप से बीमार तीन रोगियों को नया जीवन मिला।
जोधपुर। एम्स जोधपुर में वर्ष 2026 के पहले अंगदान कैडेवरिक डोनेशन को चिह्नित कर पाली जिले के 58 वर्षीय श्रमिक अनेसिंह के परिवार ने मानवता की अनूठी मिसाल पेश की है। उनके निधन के बाद परिवार ने अंगदान का नेक फैसला लिया, जिससे गंभीर रूप से बीमार तीन रोगियों को नया जीवन मिला है। पाली जिले के जोजावर, खोखराद्ध निवासी अने सिंह को बेहोशी की हालत में गत 19 जनवरी को एम्स के आपातकालीन विभाग में लाया गया। न्यूरो लॉजिकल जांच में ब्रेनस्टेम रिफ्लेक्सिस की अनुपस्थिति पाई गई। इसके बाद मेडिकल बोर्ड की ओर से उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। विस्तृत चर्चा और भावनात्मक सहयोग के बाद परिवार ने अंगदान के लिए सहमति दी और अपने दुख को दूसरों के लिए जीवन रक्षक उपहार में बदलने का साहसिक विकल्प चुना।
अंग आवंटन और ग्रीन कॉरिडोर
प्राप्त अंगों को तीन रोगियों को आवंटित किया गया। एक किडनी और लीवर को एम्स जोधपुर में रखा गया और मरीजों में सफ लतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया। एक किडनी एसएमएस अस्पताल जयपुर के एक मरीज को आवंटित की गई। अंग के त्वरित और सुरक्षित परिवहन को सुनिश्चित करने के लिए जोधपुर ट्रैफि क पुलिस और प्रशासन ने ग्रीन कॉरिडोर बनाया, जिसमें सभी नैतिक और कानूनी प्रोटोकॉल का पालन किया गया।
एम्स में हुआ 11वां अंगदान
यह दान एम्स जोधपुर में 11वां सफ ल कैडेवरिक अंगदान है। यह 2026 के लिए एक आशाजनक शुरुआत है, जो पश्चिमी राजस्थान में अंगदान जागरूकता और उन्नत प्रत्यारोपण सेवाएं प्रदान करने के संस्थान के संकल्प को और मजबूत करता है। ये प्रक्रियाएं जो अक्सर आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के तहत की जाती हैं, उन मरीजों पर वित्तीय बोझ को काफी कम करती हैं जिन्हें पहले इलाज के लिए दूर के शहरों में जाना पड़ता था।

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