दशहरे मैदान में खड़े हुए दशानन, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले : 100 टन की क्रेन से खड़ा किया 105 फीट ऊंचा रावण, सुबह 7 बजे पूरा हुआ काम
इस बार तलवार चलाने के साथ गर्दन घुमाएगा रावण, आंखें और पलकें भी झपकाएगा
कोटा। नगर निगम की ओर से आयोजित 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले के तहत 20 अक्टूबर को दशहरे पर रावण दहन के लिए रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के विशालकाय पुतले दशहरे मैदान में खड़े कर दिए गए हैं। नगर निगम की ओर से शुक्रवार देर रात पुतले खड़े करने की प्रक्रिया शुरू की गई, जो शनिवार सुबह 7 बजे तक पूरी हो सकी। विजयश्री रंगमंच के सामने आईसीसी के पक्के स्ट्रक्चर पर तीनों पुतलों को खड़ा किया गया। इनमें 105 फीट ऊंचा रावण तथा 60-60 फीट ऊंचे कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले शामिल हैं। इस दौरान नगर निगम के इंजीनियर, पुतले बनाने वाले कारीगर और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। पुतले बनाने का काम करीब सवा महीने से चल रहा था। शनिवार सुबह पुतलों के मैदान में खड़े होने के बाद बड़ी संख्या में लोग इन्हें देखने पहुंचे। विशालकाय पुतलों को देखने के लिए लोगों में खासा उत्साह नजर आया। इस बार रावण का पुतला तलवार चलाने के साथ गर्दन घुमाएगा तथा आंखें और पलकें भी झपकाएगा।
रात 12 बजे शुरू हुई प्रक्रिया, सुबह 7 बजे तक खड़ा हुआ रावण
नगर निगम के इंजीनियरों के अनुसार, सबसे पहले रात 12 बजे कुंभकरण का पुतला खड़ा करने की प्रक्रिया शुरू की गई, जो रात करीब 12:30 बजे पूरी हो गई। इसके बाद रात करीब 3:30 बजे मेघनाथ का पुतला खड़ा करने का काम शुरू हुआ, जिसे तड़के 4 बजे तक पूरा कर लिया गया। अंत में सुबह करीब 5:30 बजे रावण का पुतला खड़ा करने की प्रक्रिया शुरू की गई, जो सुबह 7 बजे तक पूरी हो सकी।
100 टन क्षमता वाली क्रेन सहित तीन मशीनों का किया उपयोग
तीनों पुतलों को खड़ा करने के लिए 100 टन क्षमता वाली एक बड़ी क्रेन, 65 टन क्षमता वाली एक छोटी क्रेन और 15 टन क्षमता वाले एक हाइड्रा का उपयोग किया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान नगर निगम का निर्माण अनुभाग मौके पर मौजूद रहा। अधिकारियों और कर्मचारियों की निगरानी में पुतलों को निर्धारित स्थान पर सुरक्षित तरीके से खड़ा किया गया।

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