सरकारी गैराज का खर्चीला पहिया : वाहनों का ‘मेंटेनेंस’ बना खजाने पर बोझ, 4 साल में मरम्मत-रख-रखाव पर 15.25 करोड़ रुपए खर्च
3 साल में 15 नए वाहन भी खरीदे
जयपुर। सरकारी वाहनों के संचालन के साथ उनके रख-रखाव और मरम्मत पर भी सरकार को हर साल करोड़ों रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। राजस्थान राज्य मोटर गैराज विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2022-23 से 2025-26 तक सरकारी वाहनों की मरम्मत-रखरखाव पर करीब 15.25 करोड़ रुपए खर्च हुए। इस अवधि में सबसे अधिक 3.98 करोड़ रुपए का खर्च 2023-24 में हुआ।
4 साल में खर्च का हिसाब :
वर्ष 2022-23 में वाहनों की मरम्मत एवं रखरखाव पर 3.18 करोड़ रुपए, 2023-24 में 3.98 करोड़ रुपए, 2024-25 में 3.74 करोड़ रुपए और 2025-26 में 3.70 करोड़ रुपए खर्च किए। यानी चारों वर्षों में खर्च करीब चार करोड़ रुपए सालाना के आसपास बना रहा।
286 सरकारी वाहन में सिर्फ 17 इलेक्ट्रिक :
राज्य मोटर गैराज विभाग के पास वर्तमान में कुल 286 सरकारी वाहन हैं। इनमें 178 पेट्रोल, 71 डीजल और 17 इलेक्ट्रिक वाहन शामिल हैं। इस तरह सरकारी बेड़े में पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों की संख्या अधिक है।
3 साल में 15 नए वाहन खरीदे :
अप्रैल, 2022 के बाद तीन साल से अधिक अवधि में राज्य मोटर गैराज विभाग ने 15 नए सरकारी वाहन खरीदे। इनमें टोयोटा इनोवा क्रिस्टा, टोयोटा फॉर्च्यूनर, टाटा नेक्सन ईवी, महिंद्रा बोलेरो पिकअप, मारुति सियाज, हुंडई वरना और टाटा कर्व जैसे वाहन शामिल हैं। वर्ष-2024 में इनोवा क्रिस्टा के साथ फॉर्च्यूनर गाडियां खरीदी। नई खरीद में टाटा नेक्सन ईवी का शामिल होना सरकारी बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग की दिशा में बढ़ते कदम को दर्शाता है।
पुराने वाहनों को हटाने की प्रक्रिया भी जारी :
वर्तमान बेड़े में 12 बुलेटप्रुफ वाहन शामिल हैं। विभाग की ओर से जरूरत के अनुसार नए वाहन खरीदे जा रहे हैं, वहीं पुराने वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रक्रिया भी जारी है।

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