सांभर झील में लौटने लगे फ्लेमिंगो, गुलाबी परिंदों से गुलजार होगी नमक नगरी
सर्दी की आहट के साथ सांभर पहुंचे फ्लेमिंगो
जयपुर। राजस्थान की प्रसिद्ध सांभर झील में सर्दियों के मौसम की आहट के साथ फ्लेमिंगो (राजहंस) का आना शुरू हो गया है। झील में इन गुलाबी परिंदों की मौजूदगी से पक्षी प्रेमियों और पर्यटकों को एक बार फिर मनमोहक नजारे देखने की उम्मीद है। हालांकि पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार बारिश कम होने से इनकी संख्या में भी कमी देखी जा सकती है।
नवंबर से मार्च तक रहता है परिंदों का डेरा
देश की सबसे बड़ी अंतर्देशीय खारे पानी की झील सांभर हर साल सर्दियों में प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण ठिकाना बनती है। नवंबर से मार्च तक यहां पक्षियों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। फ्लेमिंगो के झुंड झील के पानी में अठखेलियां करते और आसमान में उड़ान भरते दिखाई देते हैं।
45 प्रजातियों के पक्षियों का बसेरा
सांभर झील में करीब 45 प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं। यहां फ्लेमिंगो के अलावा विभिन्न प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी झील की जैव विविधता को खास बनाती है। सर्दियों में पक्षियों का आगमन न केवल प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि पक्षी अवलोकन और पर्यटन के लिहाज से भी सांभर को आकर्षण का केंद्र बनाता है।
इन वाटर बॉडीज पर बनती हैं बसेरा
पक्षी विशेषज्ञ ओमप्रकाश सैनी के अनुसार सांभर में फ्लेमिंगोज का आना शुरू हो गया है। अभी यहां रतन तालाब, मुंडिया तालाब, डेम, नालियासर और शाकम्बरी माता मंदिर के आसपास वाटर बॉडीज पर ये दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इस बार बारिश कम होने से इनकी संख्या भी कम रह सकती है।
अक्टूबर के अंत तक होगी गणना
सांभर में वन विभाग के फॉरेस्टर श्याम शर्मा का कहना है कि यहां फ्लेमिंगोज की मौजूदगी की सही संख्या की जानकारी के लिए अक्टूबर के अंत में गणना की जा सकती है। ताकि पता लगाया जाए कि इस बार इन पक्षियों की संख्या यहां कितनी है।

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