स्मार्ट सिटी में सुंदरता पर पार्किंग का ग्रहण

कागजों में दफन हो रहे नियम, उड़ रही धज्जियां

स्मार्ट सिटी में सुंदरता पर पार्किंग का ग्रहण

घरों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के बाहर सड़क पर लगा है वाहनों का अम्बार

कोटा। दृश्य 1 - शहर के सबसे व्यस्त गुमानपुरा बाजार में जहां बड़े-बड़े शोरूम व व्यवसायिक  प्रतिष्ठानों के साथ ही आलीशान आवास भी बने हुए हैं। लेकिन हालत यह है कि उन सभी के बाहर सड़क पर ही वाहनों की कतार लगी हुई है। जिससे सड़कें सिकड़ी नजर आ रही हैं और ट्रैफिक जाम हो रहा है। 

दृश्य 2 - वल्लभ नगर क्षेत्र पॉश इलाका है। जहां एक से बढ़कर एक आलीशान मकान बने हुए हैं। दो से तीन मंजिला मकान बने हुए हैं। जिनके बाहर गार्ड भी बैठे हुए हैं। लेकिन उन मकानों के अंदर कारें खड़ी करनी की जगह नहीं है। जिससे अधिकतर मकानों की लग्जरी कारें तक रात ही नहीं दिन में भी घरों के बाहर सड़क पर ही खड़ी हो रही हैं। 

दृश्य 3 - पुराने शहर के रामपुरा क्षेत्र से लेकर पाटनपोल व कैथूनीपोल तक के क्षेत्र में। जहां मकान तो पुराने समय के बने हुए हैं। जिनमें वाहन खड़े करने की जगह नहीं है। लेकिन उन मकानों में रहने वाले चार सदस्यों में से सभी के पास चार पहिया वाहन हैं। वे घर में खड़े नहीं होकर घर के बाहर सड़क पर ही खड़े हो रहे हैं। फिर उससे गली में आने वाले अन्य लोगों को परेशानी हो या यातायात जाम। किसी पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। 

यह तो उदाहरण मात्र हैं उस शिक्षा की छोटी काशी व पर्यटन नगरी के रूप में विकसित हो रहे स्मार्ट सिटी कोटा शहर की जिसकी आबादी करीब 14 लाख से अधिक है। शहर में करेीब ढाई लाख स अधिक मकान हैं और मकानों की तुलना में दो गुना से अधिक करीब 6 लाख वाहन हैं। शहर में रोजाना सौ से डेढ़ सौ नए वाहनों का पंजीयन तो हो रहा है  लेकिन उन वाहनों के पंजीयन के नियम व बॉयलोज कागजों में ही  दफन हो रहे हैं। यही कारण है कि स्मार्ट सिटी कोटा शहर में घरों के बाहर सड़कों पर खड़े वाहन सुंदरता में ग्रहण लगा रहे है। हालत यह है कि न तो अधिकतर लोगों के घरों में और न ही शोरूम व मॉल में वाहनों की पार्किंग सुविधा है। किसी घर में यदि एक वाहन की पाकिरंग जगह है तो उस परिवार में दो से तीन वाहन घर के बाहर सड़क पर खड़े हो रहे हैं। वहीं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में भी जितने वाहन आ रहे हैं उनकी तुलना में पाकिरंग की जगह बहुत कम है। 

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शहर की आबादी - 14 लाख
मकानों की संख्या - 2.80 लाख
दुपहिया - 6 लाख
चौपहिया - 3 लाख

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सभी जगह एक जैसे हालात
पुराने शहर का भीमगंमंडी इलाका हो या खेड़ली फाटक का। नयापुरा का क्षेत्र हो पाटनपोल मकबरा का। छावनी, कोटड़ी, वल्लभ नगर, नए कोटा के दादाबाड़ी से लेकज जवाहर नगर, तलवंडी, इंद्वर विहार समेत सभी पॉश इलाकों तक की यही हालत है।  इसी तरह से झालावाड़ रोड स्ति व्यवसायिक प्रतिष्ठान व मॉल हो, कु न्हाड़ी, कोटड़ी रोड, दादाबाड़ी समेत सभी इलाकों में कमोवेश यही हालात हैं। 

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यह है नियम
नियम के अनुसार 9 वर्ग मीटर तक के मकान में एक दो पहिया वाहन खड़ा करने की जगह होना आवश्यक है। 9 वर्ग मीटर से 225 वर्ग मीटर तक के मकान में एक कार खड़ी करने की जगह होना चाहिए। 225 वर्ग मीटर से अधिक की जगह पर जितना निर्माण हुआ है उसमें 115 का भाग देने पर जो आंकड़ा आएगा उतनी कार खड़ी करने की जगह उस मकान में होनी चाहिए।  यही नियम व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के लिए भी है। 

मकान में पार्किंग की जगह तभी वाहन का पंजीयन
केन्द्र व रा’य सरकार का नियम है कि मकान में वाहन खड़ा करने के लिए पार्किंग की जगह होगी उसके बाद ही वाहन का पंजीयन परिवहन विभाग में किया जाएगा। वाहन पंजीयन के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति से विभाग द्वारा इस संबंध में शपथ पत्र लिया जाता था कि उनके मकान में वाहन खड़ा करने की जगह है। सभी वाहन मालिक इसका शपथ पत्र पेश भी कर रहे हैं। जिसके आधार पर विभाग द्वारा वाहन का पंजेयन भी किया जा रहा है। लेकिन उसका भौतिक सत्यापन नहीं हो रहा। जिससे कागज में कुछ और व वास्तविकता में कुछ और ही हो रहा है। 

भवन निर्माण में नक्शा हो रहा पेश, हकीकत अलग
जिस तरह से वाहन पंजीयन के लिए पाकिरंग की जगह होना आवश्यक है। उसी तरह से भवन निर्माण के लिए बने बॉयलोज में निर्माण स्वीकृति के समय मकान का नक् शा पेश करना होता है। जिसमें पार्किंग की जगह दिखाई जाती है। लेकिन हकीकत में वह जगह नहीं छोड़कर वहां निर्माण कराया जा रहा है। 

नहीं हो रहा भौतिक सत्यापन
चाहे परिवहन विभाग हो नगर निगम व नगर विकास न्यास। हर जगह पर वाहन पंजीयन व निर्माण स्वीकृति के लिए नियम बने हुए हैं। लेकिन वे नियम कागजों तक ही सीमित हो रहे हैं। उन नियमों की पालना हो रही है या नहीं इसका भौतिक सत्यापन बहुत कम हो रहा है।  न तो परिवहन विभाग और न ही निगम-न्यास के अधिकारी मौके पर जाकर शपथ पत्र व नक् शे का सत्यापन कर रहे हैं। जिससे यह सारी समस्या हो रही है। 

भवन का निर्माण करने से पहले संबंधित क्षेत्र नगर निगम या नगर विकास न्यास में निमाण की स्वीकति का आवेदन करना होता है। उस आवेदन के साथ पार्किंग का नक् शन भी पेश किया जाता है। उसके आधार पर ही निर्माण स्वीकृति मिलती है। लेकिन हकीकत कुछ अलग है। अधिकतर लोग तो बिना स्वीकृति के ही निर्माण कर रहे हैं। कई लोग स्वीकृति का आवेदन करने पर स्वीकृति मान लेते हैं। लेकिन पाकिरंग की समस्या का कारण अधिकारियों का मौके पर जाकर सत्यापन नहीं करना है। यदि अधिकारी मौके पर जाकर सत्यता की जांच करने लगे तो ’यादातर को तो वाहन का पंजीयन ही नहीं हो। 
- राजीव अग्रवाल, महापौर कोटा दक्षिण, अध्यक्ष भवन निर्माण समिति

बॉयलोज के अनुसार भवन निर्माण के समय नक् शा पेश करना होता है। जिसमें पाकिरंग की जगह भी छोड़नी होती है। 9 वर्ग मीटर के मकान में 1 दो पहिया वाहन की और उससे अधिक व 225 वर्ग मीटर तक के मकान में चार पहिया वाहन खड़ा करने की जगह होनी चाहिए। विभाग में शपथ पत्र के आधार पर ही काम किया जा रहा है। यदि कोई गलत जानकारी दे रहा है तो उसके लिए सबंधित व्यक्ति अधिक देोषी है। 
- अमित व्यास, वरिष्ठ नगर नियोजक नगर निगम कोटा उत्तर 

नयापुरा में अधिकतर मकान पुराने बने हुए हैं। जिनके वाहन खड़े करने की जगह नहीं है। लेकिन बड़ी-बड़ी कारें अधिकतर मकान वालों के पास है। ऐसे में आलीशान मकान वालों की गाड़ियां भी सब्जीमंडी में घरों के बाहर खड़ी रहती हैंÞ। मेरे भी बच्चे बड़े हो गए हैं। परिजन कार खरीदने की जिद करते हैं लेकिन घर ऊपर का होने से गाड़ी रखने की जगह नहीं है। इस कारण से कार नहीं खरीद पा रहा हूंÞ। घर में कार खड़ी करने की जगह तो होनी ही चाहिए। 
- लालचंद टांक, नयापुरा 

शहर में जिस तरह से विकास व विस्तार हो रहा है। ऐसे में शहर में वाहनों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। लेकिन अधिकतर वाहन मकानों में खड़े नहीं होकर सड़को पर ही खड़े हो रहे हैं। इसका कारण परिवहन विभाग के अधिकारी शपथ पत्र में की गई घोषणा का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन नहीं कर रहे हैं। जबकि सभी लोग नियमों की पालना करें तो ट्रैफिक जाम व यातायात बाधित होने की समस्या ही नहीं हो। 
 - मोहम्मद इसरार, पार्षद नगर निगम कोटा दक्षिण

वाहन पंजीयन के समय पार्किंग का शपथ पत्र लिया जा रहा है। लेकिन वह सिर्फ कागजों तक ही सीमित हो रहा है। उस शपथ पत्र का अधिकारी मौके पर जाकर सत्यापन तक नहीं कर रहे हैं। घरों के बाहर ही नहीं बाजारों में भी यही स्थिति है। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस को सख्ती करनी चाहिए। नियमों की पालना करवाकर आधी समस्या का तो तुरंत समाधान किया जा सकता है। 
 - संजय शर्मा, अध्यक्ष, गुमानपुरा व्यापार संघ

वाहन पंजीयन के लिए संबंधित के मकान में पाकिरंग की जगह होना आवश्यक है। वाहनपंजीयन ही तब किया जाता है जब उसके साथ शपथ  पत्र लगाया जाता है। विभाग में रोजाना सैकड़ों वाहन पंजीयन के लिए आ रहे हैं। उनके शपथ पत्र के आधार पर पंजीयन कर रहे हैं। विभाग के पास अधिकारी व कर्मचारियों की कमी होने से सभी जगह पर भेजकर सत्यापन करवाना संभव नहीं है। 
 - दिनेश सिंह सागर, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी

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